-फजीवाड़े में निजी विवि नियामक आयोग के अध्यक्ष भारत शरण सिंह को बर्खास्त करने की सिफारिश

-उच्च शिक्षा मंत्री डा मोहन यादव की भूमिका भी संदिग्ध

धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्य प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों द्वारा की जा रही गड़बड़ियों की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को भी मिली थी, जहां से जांच के निर्देश के बाद जांच की तो गड़बड़‍ियों की पुष्टि हुई । उधर शिक्षा विभाग के अपर मुख्यसचिव शैलेंद्र सिंह ने मप्र निजी विवि नियामक आयोग की भूमिका को जांच में संदिग्ध पाया और उसके अध्यक्ष भारत शरण सिंह, पूर्णकालिक सदस्य विश्वास चौहान और उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी अनिल पाठक को निलंबित करने की फाइल तैयार कर उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव को भेजी। लेकिन, दो महीने से उन्होंने कार्रवाई करने की अनुमति देने के बजाए फाइल दबा दी।

अब अपर मुख्य सचिव ने सारे मामले से मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को अवगत कराया। तब कार्रवाई का प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेजा गया है। गौरतलब है कि फीस निर्धारण से लेकर निजी विवि की निगरानी के दायित्व में आयोग द्वारा लापरवाही की जा रही है।

नियामक आयोग ही गड़बड़ियों पर डाल रहा पर्दा

दरअसल, निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी का काम मप्र निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग को सौंपा गया है लेकिन यह आयोग गड़बड़ करने वाले विवि के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन पर पर्दा डाल रहा है। हुआ यूं कि सरकार को 11 छात्रों ने शिकायत की कि स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय उनकी अंकसूची और डिग्री प्रदान नहीं कर रहा है। इसकी जांच आयोग को सौंपी गई तो उसने शिकायतों को झूठी बताया। सरकार ने प्रकरण बंद करने से पहले उन छात्रों से ई मेल पर पूछताछ की तो उन्होंने फीस जमा करने की रसीद से लेकर सारी प्रमाण भेज दिए। ऐसी एक नहीं, कई मामलों में आयोग ने ऐसा किया।

पीएचडी की डिग्री बांटने में नियमों की अनदेखी

पीएचडी की डिग्री बांटने में भी निजी विवि मनमानी कर रहे हैं। नियमानुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पीएचडी के लिए वही गाइड हो सकते हैं, जो विवि के प्राध्यापक हैं। कई विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जिन्होंने सैकड़ों पीएचडी बांट दी लेकिन उनके पास ऐसे प्राध्यापक हैं ही नहीं। मध्य प्रदेश में 41 निजी विश्व विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। कई फर्जीवाड़ों द्वारा चार वर्ष की डिग्री एक महीने में प्रदान कर दी जाती है। इन विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों का पंजीयन, उनकी फीस जमा करने की तिथि की सूचना निजी विवि आयोग को अनिवार्य रूप से दी जाना चाहिए, लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

तेलंगाना पुलिस ने भेजे दो और वारंट

पैसे लेकर पीएचडी की फर्जी डिग्री बांटने के मामले में तेलंगाना पुलिस ने दो वारंट और जारी किए हैं। एसआरके विवि के डीन डा.एमके चोपड़ा और तत्कालीन रजिस्ट्रार ऋचा गुप्ता को वारंट तामील कर तेलंगाना पुलिस ने सात दिसंबर तक पेश होने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी विवि के तीन लोगों को तेलंगाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इन पर आरोप है कि इन्होंने पैसे लेकर बिना उपस्थिति के लोगों को फर्जी डिग्री बांटी।

इनका कहना है

मप्र के निजी विश्वविद्यालयों में गड़बड़ी के मामलों की जांच चल रही है। निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग की भूमिका का मामले में भी पत्राचार की कार्रवाई चल रही है।

शैलेंद्र सिंह, अपर मुख्यसचिव, उच्च शिक्षा विभाग मप्र शासन

बातचीत करने से बचते रहे मंत्री

निजी विश्वविद्यालयों में चल रहे गोलमाल के संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री डा मोहन यादव से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे भोपाल से बाहर थे। फोन पर बात करने से भी वे बचते रहे। उनके कार्यालय में संपर्क करने पर बताया गया कि मंत्रीजी ने एक मामले में स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय की जांच की फाइल पर दो दिन पहले आदेश कर दिए हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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