भोपाल से हरिचरण यादव। मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली और धार्मिक मान्यताओं में मां का स्थान रखने वाली नर्मदा नदी (मां रेवा) करीब 1000 किमी लंबे अपने प्रवाह के ज्यादातर हिस्से में प्रदूषण से प्रभावित है। हाल ही में हुई भारी बारिश और कई बार बाढ़ से लबालब होने के बाद भी पानी में 'अशुद्धता' बरकरार है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक नर्मदा नदी के 14 घाटों का पानी आचमन करने योग्य नहीं है। इन घाटों का पानी बी-श्रेणी का पाया गया है। इस पानी को बिना ट्रीटमेंट किए पीना उपयुक्त नहीं है। यह स्थिति नर्मदा नदी में लगातार सीवेज मिलने और गणेशोत्सव के बाद घाटों पर प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) व रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के विसर्जन के कारण बनी है। इसका खुलासा बोर्ड द्वारा शुक्रवार को जारी की गई नर्मदा नदी के 50 घाटों के पानी की जांच रिपोर्ट में हुआ है।

इस रिपोर्ट में जिन घाटों का पानी बी-श्रेणी का पाया गया है, वे घाट होशंगाबाद के सांडिया से लेकर देवास जिले के नेमावर के बीच के हैं। इनमें होशंगाबाद का सबसे बड़ा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध सेठानी घाट समेत अन्य घाट भी शामिल हैं। हाल ही में शरद पूर्णिमा को घाटों पर स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालु घाट की गंदगी और पानी में घुली गंदगी से काफी निराश हुए। डराने वाला दूसरा तथ्य यह है कि, राजधानी भोपाल में घरों में सप्लाई के लिए पानी भी होशंगाबाद के इन्हीं घाटों से लाया जाता है।

तेज बहाव में यह स्थिति है तो गर्मी में स्थिति और बुरा होगी : पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे का कहना है कि अभी नर्मदा नदी में तेज बहाव है। बारिश के कारण नदी में पानी का स्तर अच्छा खासा है। तब प्रदूषण की यह चिंतनीय स्थिति हो रही है। गर्मी में जलस्तर बहुत कम रहता है, तब प्रदूषण खतरनाक स्तर पर होता है। नर्मदा नदी के पानी को शुद्ध करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन सीवेज को मिलने से नहीं रोका जा रहा है। गर्मी के दिनों में हालत और बिगड़ेंगे।

इन घाटों का पानी बी-श्रेणी का

नर्मदा नदी के सांडिया, जैत गांव के ऊपर व नीचे वाले घाट, शाहगंज अतिथि विश्राम का घाट, बांद्राभान, तवा रामनगर, बुदनीघाट, कोरी, सेठानी, एसपीएम नाला, होलीपुरा बुदनी, जामनेर नेमावर, इंटकपॉइंट नेमावर और जैन मंदिर नेमावर घाट का पानी बी-श्रेणी का पाया गया है।

ऐसा होता है बी-श्रेणी का पानी

ऐसा पानी, जो मटमैला हो, डीओ (घुली हुई ऑक्जीजन) की मात्रा 5 एमजी प्रति लीटर से कम हो गई हो, बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा 3 एमजी प्रति लीटर से बढ़ गई हो और टीसी का स्तर 50 एमपीएन प्रति 100 एमएल से ज्यादा हो गया हो तो पानी बी-श्रेणी में आता है। इस पानी को बगैर ट्रीटमेंट किए पीने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें जीवाणु समेत कई तरह के हानिकारक तत्व व पदार्थ होते हैं। ये शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस श्रेणी के पानी का उपयोग केवल कपड़े धोने में किया जा सकता है।

सीवेज मुख्य वजह

नर्मदा नदी के जिन घाटों का पानी बी-श्रेणी का आया हैं वहां सीवेज मिलता है। स्थानीय निकाय व एजेंसियों को सीवेज नर्मदा नदी में मिलने से रोकने के इंतजाम करने चाहिए। मूर्ति विसर्जन को भी जनजागरूकता अभियान से रोका जा सकता है। - डॉ. रीता कोरी, मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी, राज्य स्तरीय प्रयोगशाला, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मप्र

नर्मदा पट्टी में इनकी अलग और अबूझ परेशानी

नर्मदा नदी से लगे मालवा- निमाड़ के कुछ जिले बैकवाटर की बाढ़ और विस्थापन के अलावा एक अलग और अबूझ परेशानी से जूझ रहे हैं। बड़वानी, खंडवा, खरगोन और धार जिलों के कई गांवों में भूगर्भीय हलचल और कंपन महसूस हो रहे हैं। कंपन से जुड़ी आवाजें रह-रहकर आती हैं और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ाती रहती हैं। कई विशेषज्ञ इन क्षेत्रों का दौरा भी कर चुके हैं लेकिन कोई खास हल नहीं निकल पाया। बड़वानी जिले के करीब 10 ग्रामों में 9 अगस्त से भूगर्भीय हलचल हो रही है। यह रुक-रुक कर जारी है। अंजड़ क्षेत्र के ग्राम भमोरी, साकड़, राजीव गांधी नगर, भागसूर आदि गांवों में यह हलचल सुनाई दी। इस दौरान जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया नागपुर, भोपाल व जबलपुर की टीमों ने क्षेत्र का सर्वे भी किया।

नागपुर की टीम द्वारा 10 दिन के लिए तीन स्थानों पर सिस्मोग्राफ (भूकंपमापी उपकरण) भी लगाए गए। रिपोर्ट में भूगर्भीय हलचल का कारण अत्यधिक वर्षा को बताया गया। प्रशासन द्वारा संबंधित क्षेत्र में महज जागरूकता संदेश देने के अलावा कोई प्रयास नहीं किए गए। खंडवा जिले के ग्राम गोकुलगांव में भी इसी तरह की आवाजों के बाद नागपुर के भू वैज्ञानिकों ने यहां जायजा लिया। यहां की जियोलॉजी, मैथोलॉजी और टोपोग्राफी रिपोर्ट का असेसमेंट कर विशेषज्ञ और अधिकारी फाइनल रिपोर्ट तैयार करेंगे।

प्रारंभिक तौर पर यह स्थिति बारिश की वजह से भूजलस्तर बढ़ने से हो रहे बदलाव से बनने की संभावना जताई जा रही है। धार जिले के सरदार सरोवर बांध से प्रभावित ग्राम एकलवारा और पिपल्दा गढ़ी व कवठी में एक माह में पांच- छह बार भूगर्भीय हलचल हो चुकी है। हालांकि इससे संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ। ग्रामीण दहशत में रहे और वे घरों से बाहर निकल आए।

बताया जाता है कि जब बड़े बांधों में पानी भरता है तो इस तरह के भूगर्भीय धमाके सुनाई देते हैं। इनकी तीव्रता मापने के लिए कुक्षी के पास ग्राम सीलकुआं में भूकंपमापी यंत्र स्थापित किया गया है। इसकी रिपोर्ट सीधे गुजरात पहुंचती है। यहां के अधिकारियों ने उसमें भूकंप के झटके दर्ज होने से मना किया है। खरगोन जिले के ग्राम शकरखेड़ी, दगड़खेड़ी और सिगनूर में 11 अक्टूबर को भूगर्भीय हलचल महसूस होने के बाद गोगावां तहसील के राजस्व निरीक्षक केएस जाधव ने मौकामुआयना किया था।

Posted By: Prashant Pandey