राजीव सोनी, भोपाल। कोरोना संक्रमण और महामारी के दौर में जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से लेकर सभी कार्यालय नकद लेनदेन को हतोत्साहित करने में लगे हैं, तब प्रदेश में बिजली कंपनी नकद बिल भुगतान को बढ़ावा दे रही है। कंपनी ने चेक से बिल भुगतान लेने पर रोक लगा दी है। मजबूरी में औद्योगिक क्षेत्र, केंद्रीय कार्यालय और घरेलू उपभोक्ताओं को नकद भुगतान करना पड़ रहा है। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था तीनों मध्य, पूर्व एवं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों में जून से ही लागू कर दी गई है।

आयकर, कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज व जीएसटी सहित सभी केंद्रीय कार्यालयों और घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं ने जब बिजली का बिल चेक से भेजा तो चेक अमान्य कर दिए गए, उन्हें नकद भुगतान करने को कहा गया। बिजली कंपनी की ओर से कहा गया कि हमने चेक से भुगतान लेना बंद कर दिया है और ऑनलाइन भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। कंपनी का रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं केंद्रीय कार्यालयों के अधिकारियों का कहना है कि हम सभी तरह के भुगतान राष्ट्रपति के नाम से करते हैं, ऐसे में इन चेक को बिजली कंपनी स्वीकार करने से मना कैसे कर सकती हैं, वह भी कोरोना संक्रमण के दौर में?

इनकी शिकायत है कि आरटीजीएस के जरिए ऑनलाइन भुगतान का बिजली कंपनी ठीक ढंग से रिकॉर्ड नहीं रखती। कई मर्तबा ऐसा भी हुआ, जब बिल भुगतान होने के बावजूद कर्मचारी बिजली काटने पहुंच गए। चेक से भुगतान करने पर उपभोक्ता के पास दस्तावेजी सबूत मौजूद रहता है। हाल ही में आयकर विभाग सहित कुछ अन्य केंद्रीय कार्यालयों के चेक बिजली कंपनी ने लौटा दिए। इन कार्यालयों की ओर से इस पर आपत्ति भी जताई गई है।

नोट गिनने में संक्रमण का खतरा

औद्योगिक क्षेत्र के उच्च-निम्न दाब उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके कारखानों के बिल लाखों रुपये में आते हैं। वे यदि नकद भुगतान के लिए नोट गिनेंगे तो उनके साथ बिजली कंपनियों के कर्मचारियों पर भी कोरोना महामारी के संक्रमण का खतरा बना रहेगा। ऑनलाइन भुगतान में कई उपभोक्ताओं को दिक्कत आती है, इसलिए वे सभी चेक से बिल भुगतान देना चाहते हैं।

इसलिए लगाई रोक...

बताया जाता है कि बिजली कंपनियों ने चेक पर इसलिए रोक लगा दी, क्योंकि जिन उपभोक्ताओं के चेक अमान्य होते हैं। उनका रिकॉर्ड रखने, डिमांड नोटिस भेजने और बिजली काटने की औपचारिकता बढ़ जाती है, इसलिए कंपनियों ने सभी उपभोक्ताओं के लिए रोक का फरमान जारी कर दिया।

'ईज ऑफ डूइंग' के जमाने में यह कैसा निर्णय?

जब रिजर्व बैंक ने यह सुविधा दे रखी है तो बिजली कंपनी इस पर रोक कैसे लगा सकती है? कंपनी चेक भुगतान तीन दिन पहले लेती है, एक दिन में चेक क्लियर हो जाता है। ऐसा होने से छीना-झपटी, लूट का खतरा भी रहेगा। बैंकों में लाइन लगाना पड़ेगी अनावश्यक रूप से समय लगेगा और कोरोना संक्रमण का खतरा भी बढ़ेगा। - अमरजीत सिंह, अध्यक्ष, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, भोपाल

हां, चेक से बिल भुगतान स्वीकारने पर इसी महीने से रोक लगा दी गई है। यह निर्णय शासन ने नहीं बल्कि कंपनी ने लिया है। नकद भुगतान के लिए कई अतिरिक्त काउंटर की सुविधा बढ़ा दी गई है। ऑनलाइन भुगतान भी स्वीकार किए जा रहे हैं। - विशेष गढ़पाले, प्रबंध निदेशक, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल

Posted By: Prashant Pandey

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