Power Crisis in Madhya Pradesh: भोपाल। (राज्य ब्यूरो)। प्रदेश में जिस तरह बिजली की मांग और आपूर्ति में अंतर की स्थिति बन रही है, उससे दीपावली के बाद रबी सीजन के दौरान बिजली का संकट खड़ा हो सकता है। पिछले साल रबी सीजन यानी 15 नवंबर से 15 जनवरी के बीच बिजली की औसत मांग 12 हजार मेगावाट से अधिक थी। वहीं, 30 दिसंबर 2020 को 15 हजार 450 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग दर्ज की गई थी। दरअसल, प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों से उत्पादन क्षमता से आधा ही हो रहा है, जबकि अब मांग तेजी से बढ़ रही है।

कुछ दिनों से आपूर्ति के लिए बिजली कंपनियां ओवर ड्रा करके बिजली की आपूर्ति कर रही हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कटौती भी प्रारंभ हो गई है। कोयला भी बिजली संयंत्रों के पास तीन से सात दिन का ही बचा है। बांधों में पानी कम होने के कारण रबी सीजन तक जल विद्युत परियोजनाओं से भी बिजली उत्पादन कम हो जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक आने वाले समय में प्रदेश में बिजली का संकट गहरा सकता है।

खासतौर से दीपावली के बाद रबी की फसल के दौरान सिंचाई के लिए किसानों को बिजली की सर्वाधिक जरूरत रहती है। ऐसे समय में हमारे बांधों के पास पर्याप्त पानी नहीं होगा। ताप विद्युत संयंत्रों को चलाने के लिए पर्याप्त कोयला नहीं है। पिछले साल इन दिनों बिजली संयंत्रों में 13 लाख टन कोयला था, लेकिन इस साल मात्र ढाई लाख टन ही कोयला बचा है। ऐसे हालात में पूरी क्षमता से संयंत्र चल नहीं पाएंगे। इसके साथ ही बिजली की मांग भी बढ़ जाएगी।

कहां से लाएंगे बिजली

पूर्व अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल कहते हैं कि एनटीपीसी के संयंत्रों के पास भी कोयला कम है। बांध खाली हैं। सोलर (सौर ऊर्जा) से मिलने वाली बिजली शाम के बाद मिल नहीं सकती है। उसका भंडारण करने की तकनीक अभी अपने यहां नहीं है। पवन ऊर्जा से भी इसकी पूर्ति नहीं हो सकती। ऐसे हालात में रबी का सीजन बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। जो बिजली संकट न आने का दावा कर रहे हैं, उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि पर्याप्त बिजली की उपलब्धता के लिए उनके पास क्या योजना है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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