भोपाल ( नवदुनिया प्रतिनिधि)। भोपाल समेत प्रदेश भर में पिछले एक हफ्ते से कोरोना के मरीज बढ़ने के बाद अस्पतालों में लगे उपकरणों की टेस्टिंग करने के निर्देश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को दिए थे। इसी कड़ी में तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर छोटे बड़े अस्पतालों में लगाए गए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट्स की बुधवार सुबह 9 बजे से मॉकड्रिल शुरू हुई। छह घंटे तक प्लांट्स को चला कर देखा जा रहा है कि लगातार चलाने में कोई तकनीकी दिक्कत तो नहीं आ रही है। मॉकड्रिल के दौरान यह भी देखा जाएगा कि ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट्स से निकलने वाली मेडिकल ऑक्सीजन में शुद्धता कितनी है। यह माना जाता है कि तरल ऑक्सीजन 98 फीसद तक शुद्ध होती है, जबकि प्लांट्स में तैयार होने वाली मेडिकल ऑक्सीजन की शुद्धता 92 फीसद तक ही रहती है।

बता दें कि पूरे प्रदेश में 201 ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाए गए हैं। इनमें 178 पूरी तरह से तैयार होकर काम करने की स्थिति में आ गए हैं। इन्हीं का बुधवार को ड्राई रन किया जा रहा है।

राजधानी में मॉक ड्रिल देखने जेपी अस्पताल पहुंचे कलेक्टर

भोपाल के कलेक्टर अविनाश लवानिया बुधवार दोपहर 12 बजे के करीब जेपी अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने प्लांट का अवलोकन किया। इंजीनियरों से पूछा कि कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है। बता दें कि यहां एक 1000 लीटर प्रति मिनट प्रति प्लांट की क्षमता वाले दो आक्‍सीजन जनरेशन प्लांट लगाए गए हैं। दोनों प्‍लांट्स पीएम केयर्स फंड से लगे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महीने भर पहले इनका शुभारंभ भी किया था। आइसीयू में भर्ती होने वाले मरीज को औसतन 10 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। इस लिहाज से यदि दोनों प्लांट लगातार चालू रहे तो हर समय 200 मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरत इनसे पूरी हो जाएगी। बता दें कि भोपाल में 10 प्लांट लगाए जाने हैं। 30 सितंबर तक इन्हें तैयार हो जाना था, लेकिन अभी साथ ही शुरू हो पाए हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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