भोपाल। भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने के प्रस्ताव को निगम परिषद ने बहुमत के आधार पर खारिज कर दिया। मंगलवार को आईएसबीटी में आयोजित परिषद की विशेष बैठक में भाजपा पार्षदों ने निगम के बंटवारे के खिलाफ हाथ उठाकर वोटिंग की। वहीं, कांग्रेसी पार्षद सुनियोजित तरीके से शुरू से आखिर तक हंगामा करते रहे। अब भाजपा पार्षद दल राज्यपाल से मिलकर परिषद के फैसले की जानकारी देगा।

बैठक की शुरुआत में सदन के नेता महापौर आलोक शर्मा ने अपना वक्तव्य शुरू किया। उन्होंने जैसे ही कहा कि धार्मिक आधार पर नगर निगम का बंटवारा किया जा रहा है। तभी कांग्रेसी पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेसियों का कहना था कि शहर में कितने धार्मिक स्थल हैं, इसका सर्वे कब कराया गया। हंगामे के चलते महापौर ने अपना भाषण रोक दिया। इसके बाद सत्तापक्ष भी हंगामा करने लगा। नेता प्रतिपक्ष सगीर सहित कांग्रेसी पार्षद इस बात पर अड़ गए कि उन्हें बोलने का मौका दिया जाए।

आखिर में महापौर का वक्तव्य हो। एमआईसी मेंबर कृष्णमोहन सोनी ने तर्क दिया कि चूंकि भाजपा पार्षदों की ओर से विशेष बैठक का प्रस्ताव लाया गया है, लिहाजा सदन के नेता महापौर पहले भूमिका रखेंगे। फिर पार्षदों को मौका दिया जाना चाहिए। इस बीच कांग्रेसी पार्षद बैठक का बहिष्कार कर सदन से बाहर चले गए। इसके बाद फिर महापौर ने भाषण देना शुरू किया। लेकिन, कांग्रेसियों ने पहुंचकर फिर हंगामा शुरू कर दिया। लगातार हंगामे के कारण बैठक पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।

बंद कमरे में भाजपा ने बनाई रणनीति

बैठक स्थगित होने के बाद बंद कमरे में महापौर शर्मा ने भाजपा पार्षदों के साथ रणनीति तैयार की। इसके बाद फिर महापौर ने अपना वक्तव्य शुरू किया। लेकिन नेता प्रतिपक्ष सगीर, कांग्रेसी पार्षद अमित शर्मा, गिरीश शर्मा खड़े होकर हंगामा करने लगे। फिर महापौर ने भाषण रोक दिया। कांग्रेसी आसंदी के सामने धरने पर बैठ गए और भाजपा पार्षद भी आसंदी को घेरकर विरोध करने लगे। अध्यक्ष ने पूछा कि कौन पहले बोलेगा कौन बाद में बोलेगा, निगम एक्ट में कहां प्रावधान है बताएं। लेकिन कांग्रेसी पार्षद नहीं बता पाए। फिर अध्यक्ष ने एक्ट में पढ़कर बताया कि पीठासीन अधिकारी जिसे चाहेगा वह बोलेगा।

लिखित आधार पर कार्यवाही आगे बढ़ाने की मांग

लगातार हंगामे के चलते भाजपा पार्षदों ने अध्यक्ष को निगम बंटवारे के खिलाफ लिखित आपत्ति सौंपी। एमआईसी मेंबर केवल मिश्रा, पार्षद रविंद्र यति ने अध्यक्ष से आग्रह किया कि महापौर की ओर से लिखित भाषण और भाजपा पार्षदों की ओर से लिखित आपत्ति दे चुके हैं। ऐसे में सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाएं। इसके बाद अध्यक्ष चौहान ने निगम के बंटवारे के खिलाफ हाथ खड़े कर सहमति मांगी तो भाजपा पार्षदों के बहुमत के आधार पर प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

सदन के अंदर लगे जय कमलानाथ के नारे

सदन के अंदर कांग्रेसियों ने जहां जय जय कमलनाथ के नारे लगाए तो भाजपाईयों ने कमलनाथ मुर्दाबाद के। कांग्रेसियों ने धरना देकर रघुपति राघव राजा राम भजन गाया। वहीं, भाजपाइयों ने कांग्रेसी नेताओं को सदबुद्घि देने की कामना करते हुए बंटवारे के खिलाफ नारेबाजी की।

अनुपस्थित रहे कांग्रेसी पार्षद, एकजुट दिखी भाजपा

सदन में कांग्रेसी पार्षदों की संख्या कम है, ऊपर से इतने महत्वपूर्ण विषय पर पांच कांग्रेसी पार्षद अनुपस्थित रहे। इसमें शबिस्ता जकी, सीमा सक्सेना, सीमा मालवीय, शाहवर मंसूरी और शमीम नासिर हैं। जबकि भाजपा के मनफूल मीना (अब कांग्रेस में) को छोड़कर सभी पार्षद मौजूद रहे। एक भाजपाई पार्षद का निधन हो चुका है। नगर निगम सदन में भाजपा के 55 और कांग्रेस के 29 पार्षद हैं।

कांग्रेसी पार्षदों ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन

बैठक समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष सगीर के साथ कांग्रेसी पार्षदों ने संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा कि उन्हें अध्यक्ष ने सुनियोजित तरीके से बोलने का अवसर नहीं दिया। लिहाजा पारित किए गए प्रस्ताव को खारिज किया जाए।

इनका कहना

विशेष बैठक भाजपा ने बुलाई थी, इसलिए मैं भूमिका रखने के लिए खड़ा हुआ। इसके बाद पार्षद अपनी बात रखते। लेकिन कांग्रेस के पास ठोस आधार नहीं था इसलिए वे चर्चा से बचने के लिए हंगामा कर व्यवधान डालते रहे। हम राज्यपाल से मिलेंगे और पारित किए गए संकल्प से अवगत कराएंगे। किसी भी कीमत पर शहर का बंटवारा नहीं होने दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो न्यायालय भी जाएंगे।

-आलोक शर्मा, महापौर

महापौर ने परिषद की विशेष बैठक बुलाई थी, लेकिन वे खुद बोलने लगे। महापौर के बोलने के बाद तो पार्षदों को बोलने का मौका ही नहीं मिलता। हमारी मांग थी कि पहले पार्षदों को बोलने दें फिर महापौर बोलें इसलिए हमने उन्हें बोलने नहीं दिया। इस मामले को लेकर हमने संभागायुक्त से शिकायत भी की है।

-मोहम्मद सगीर, नेता प्रतिपक्ष

Posted By: Nai Dunia News Network

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