तूर्यनाद-20 में वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव का व्याख्यान

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) की राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा आयोजित तूर्यनाद-2020 के तीसरे दिन अतिथि परिचर्चा सत्र में वरिष्ठ पत्रकार, भाषाविद एवं पूर्व संसदीय सलाहकार राहुल देव अतिथि वक्ता के रूप में ऑनलाइन जुड़े। वर्तमान में सबसे आवश्यक व चर्चित विषय 'मातृभाषा में शिक्षा' पर राहुल ने कहा कि बच्चों का संपूर्ण विकास मातृभाषा में ही हो सकता है, इसमें कोई संदेह नहीं है। उन्होंने मातृभाषा का महत्व समझाते हुए कहा कि जो स्थान जन्म के बाद मां के दूध का होता है, वही स्थान भाषा का होता है। जिस भाषा में बच्चों का संसार से परिचय हुआ है एवं उसने आसपास के संसार के बारे में बुनियादी जानकारी एकत्रित की है, वही भाषा उसके सीखने का सबसे अच्छा माध्यम होती है। भारत आज कई क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है, उसका एक मुख्य कारण मातृभाषा में शिक्षा न मिलना है।

नई शिक्षा नीति से आस

दुनिया के 20 सबसे समृद्घ देश में मात्र चार अंग्रेजी भाषा में कार्य करते हैं, बाकी सब अपनी भाषा में कार्य करते हैं। शोध बताते हैं कि मातृभाषा में पढ़ने वाला बच्चा अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा एवं उसका आत्मविश्वास सुदृढ़ होगा। विदेशी पराधीनता की सबसे बड़ी कमी यह भी है उन्होंने संपूर्ण भारत में अंग्रेजी माध्यम लागू कर दिया। अंग्रेज चाहते थे कि हम शरीर से भारतीय किंतु मन से अंग्रेज बन जाएं। बड़े स्तर पर उच्च शिक्षा की पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद होना आवश्यक है। श्री देव ने आगे कहा कि आज नई शिक्षा नीति ने भारतीय भाषाओं को केंद्रीय महत्व देकर जो आशा जगाई है, यदि वह ईमानदारी से लागू होती है तो लगभग 72 साल बाद भारत की शिक्षा व्यवस्था की वहां से शुरुआत होगी, जहां से अधिकांश समृद्घ देश पहले ही शुरुआत कर चुके हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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