- रवींद्र भवन में कुली और लोको पायलेट्स का सम्मान और संगीत संध्या

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

रवींद्र भवन में मंगलवार की शाम एक विशेष संगीत संध्या का आयोजन किया गया। रेलयात्रियों की सेवा में उपस्थित कुली और लोको पायलेट्स के सम्मान में हुई इस संगीत संध्या में ऐसे गीतों की प्रस्तुति हुई जो टे्रन या स्टेशन पर फिल्माए गए हैे। बाबरा म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों ने गीतों की प्रस्तुति देकर समां बांधा। कार्यक्रम के आयोजक हरीश जय सिंघानिया ने बताया कि ट्रेन में फिल्माए गीतों के साथ रेलवे कुली और लोको पायलेट्स के सम्मान का मप्र में अपनी तरह का यह पहला आयोजन है। कार्यक्रम डेढ़ घंटे का रहा, जिसमें 22 गानों की प्र्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में मौजूद लोको पायलेट्स और कुलियों ने अपने पसंदीदा गीत सुनकर खूब तालियां बजाईं और आनंद उठाया। इस अवसर पर भोपाल स्टेशन पर कुली पप्पू राम, गुलाब नबी, प्रभू महावर और मोहम्मद अली को सम्मानित किया गया। वहीं लोको पायलेट्स ज्युलिस जॉर्ज और विकास ग्वाल, असिस्टेंट लोको पायलेट पल्लवी विश्वास और प्रीति पटेल को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अवार्ड दिए गए।

है अपना दिल तो आवारा..

संगीत संध्या की शुरुआत सभी गायकों ने फिल्म द बर्निंग ट्रेन के गीत तेरी है जमीन, तेरा आसमां...से की। इसके बाद शिवराव ने रुख से जरा नकाब उठा दो... और हरीश जय सिंघानिया ने है अपना दिल तो आवारा.., सुनाया। वहीं मो.साजिद और पूर्वी सुहास ने कस्तो मजा है रेलइमा.., सुहासिनी जोशी और शिवराव ने मैं चली मैं चली पीछे- पीछे जहां.., असलम हमदुले ने गीत मैं हूं झुम झुम झुम झुमरू.., रिंकू ने होगा तुमसे प्यारा कौन..., हमको तो तुमसे है ओ कांचा प्यार.., गीत सुनाया। वहीं अनमोल ने मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू..., शिवराव और मो.साजिद हाथों की चंद लकीरों का यह खेल है सब तकदीरों का..., सुहासिनी जोशी ने मेरे पी को पवन किस गली ले चली...,मो साजिद और पूर्वी सुहास चल छैंया-छैंया चल छैंया.., शिवराव ने सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं..., सुहासिनी जोशी और रिंकू हम दोनों दो प्रेमी दुिनया छोड़ चले... गीत पेश किया।

Posted By: Nai Dunia News Network