भोपाल। Khushwant Singh Book रेलवे बोर्ड(Railway board) की यात्री सेवा समिति (पीएससी) के चेयरमैन रमेशचंद्र रत्न(Ramesh Chandra Ratna) ने बुधवार को भोपाल स्टेशन पर निरीक्षण के दौरान प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह(Khushwant Singh) के उपन्यास 'वूमेन, सेक्स, लव एंड लस्ट' को अश्लील बताया। उन्होंने स्टेशन के बुक स्टॉलों(Railway book stall) पर इस किताब को बेचने पर रोक लगा दी। प्लेटफॉर्म के एक स्टॉल पर कुछ अन्य किताबों को भी चेयरमैन ने अश्लील बताया और अधिकारियों से उन्हें जब्त करवाई। हालांकि, इस मामले में चेयरमैन व रेल अफसरों में मतभेद भी दिखा। चेयरमैन ने जिन दो किताबों को अश्लील बताया, उनमें से एक के बारे में सीनियर डीसीएम अनुराग पटैरिया व अन्य अधिकारियों ने कहा कि ये किताब बिक सकती है, इस पर रोक नहीं है। अधिकारियों के तर्क पर चेयरमैन कहने लगे मुझे पक्का पता है कि ये किताब अश्लील है और इसे नहीं बेच सकते, गलत संदेश जाएगा। इसके बाद अधिकारी चुप हो गए।

यात्री सेवा समिति के चेयरमैन व सदस्य वेटिंग रूम के अंदर भी गए। यात्रियों से पूछा कि कोई शुल्क तो ज्यादा नहीं ले रहा है। इस पर यात्रियों ने इनकार कर दिया। प्लेटफॉर्म-2 पर यात्री फर्श पर बैठे दिखे तो बेंच लगाने को कहा। उन्होंने प्लेटफॉर्म-6 की तरफ भी यात्री सुविधाओं का जायजा लिया। वे सुबह मंडीदीप स्टेशन का भी निरीक्षण कर चुके थे। भोपाल रेलवे स्टेशन पर बगैर वजन व तारीख लिखे जनता खाना बेचने वाले पांच स्टॉल संचालकों पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। रत्न व अन्य सदस्यों ने ये कार्रवाई की। समिति के चेयरमैन व सदस्यों ने स्टेशन पर अश्लील किताबें बेचने वालों को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई।

यह निरीक्षण दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक किया। कई और भी कमियां मिली हैं, जिन्हें पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि चेयरमैन ने साफ-सफाई में स्टेशन को 10 में से 9 अंक देने की बात कही है, जबकि स्टेशन स्वच्छता सर्वेक्षण में भोपाल स्टेशन 335वें स्थान पर आया है। यह रिपोर्ट हाल ही में आई थी। रत्न दो सदस्य पूजा विधानी और रमेश शर्मा के साथ दोपहर एक बजे भोपाल स्टेशन पहुंचे थे।

नकद रुपए नहीं लेना चाहिए, अफसर बोले- ले सकते हैं सर

समिति के चेयरमैन व सदस्यों ने प्लेटफार्म-1 से निरीक्षण शुरू किया। वे सांची स्टॉल पर पहुंचे और कहने लगे कि उत्पाद बेचने पर नकद रुपए लेने का नियम नहीं है। इस पर अधिकारियों ने बताया कि नकद भी ले सकते हैं लेकिन बिल देना होगा। इसके बाद उन्होंने एक अन्य स्टॉल पर पेटिस की जांच की। स्टॉल संचालक का लाइसेंस देखा। आगे बढ़े तो एक अन्य स्टॉल पर जनता खाने के डिब्बे पर पैकिंग की तारीख, खाने का वजन नहीं मिला। इस पर वे भड़क गए और कहने लगे, अगली बार से सुधार नहीं किया तो जुर्माना लगेगा।

Posted By: Prashant Pandey