भोपाल। गांधी सागर में पानी छोड़े जाने के बाद प्रदेश के कई जिलों में आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। किसान सर्वे और मुआवजे की मांग उठा रहे हैं तो वहीं मामले में अब सियासत शुरू हो गई है। बुधवार को ग्वालियर अंचल के जिलों के दौरे पर पहुंचे पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जहां प्रदेश सरकार को घेरा, वहीं प्रदेश के सामान्य प्रशासन मंत्री ने पूर्व सीएम पर ही आरोप लगा दिए।

गांधी सागर को क्षमता से ज्यादा भरा, इसलिए आई बाढ़ : शिवराज सिंह

श्योपुर में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि गांधी सागर को उसकी क्षमता (1312 फीट) से ज्यादा (1320 फीट) भर दिया। बांध ओवरफ्लो हुआ तो सारे गेट एक दम खोलकर पानी निकाल दिया। इससे चंबल नदी में उफान आया और किसानों की फसल व घर चौपट कर दिए। उन्होंने इस मामले में जांच की मांग की। उन्होंने इस आपदा के समय भी मुख्यमंत्री के न आने पर भी तंज किया।

सरदार सरोवर की ऊंचाई बढ़ाने से प्रदेश के हालत बिगड़े : मंत्री सिंह

दूसरी ओर पूर्व सीएम शिवराज सिंह के आरोपों का जवाब सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने प्रेसवार्ता कर दिया। उन्होंने कहा कि शिवराज ने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश करने और गुजरात को फायदा पहुंचाने के लिए सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ा दी थी। इससे इस बार मध्य प्रदेश में बाढ़ के हालात बने और किसानों फसलें और घर तबाह हो गए।

इधर केंद्र से तुरंत मांगा 11 हजार 861 करोड़ रुपए का पैकेज

प्रदेश में भारी बारिश से किसानों की फसलों और जान-माल को काफी नुकसान हुआ, जिसके लिए राहत कार्य चालू करने कमलनाथ सरकार ने केंद्र सरकार से 11 हजार 861 करोड़ रुपए के पैकेज की तुरंत मांग की है। अभी तक राज्य सरकार ने 325 करोड़ रुपए खर्च कर राहत और बचाव कार्य किए हैं।

कमलनाथ सरकार ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने बाढ़ प्रभावितों के लिए पैकेज नहीं दिया तो राज्य सरकार अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी। यह आरोप प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा, पीसीसी के मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा आदि ने पीसीसी में बुधवार को लगाए।

बदहाल सड़कों की सूरत सुधारने, विभाग को है केंद्रीय मदद का इंतजार

प्रदेश में भारी बारिश के कारण प्रभावित जिलों से लोक निर्माण विभाग को सड़कों की बदहाली की जो तस्वीर मिली है, उससे सरकार की चिंता बढ़ गई है। शासन की ओर से केंद्र को भेजी रिपोर्ट में 1566 करोड़ रुपए की सड़कें खराब होने की जानकारी दी गई है। लोक निर्माण विभाग ने भी विभिन्ना जिलों से सभी तरह की सड़कों के नुकसान का ब्योरा भी बुलवा लिया है।

राजधानी भोपाल के आसपास और पश्चिमी मप्र के मंदसौर, रतलाम और नीमच जैसे जिलों में हो रही लगातार बारिश के कारण सड़कें ध्वस्त हो चुकी हैं। विभागीय प्रमुख का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर हमने करीब 920 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा है। बारिश थमने का इंतजार किया जा रहा है। खासतौर पर इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता आरके मेहरा ने बताया कि सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए कार्ययोजना बन चुकी है। नुकसान का आकलन कर सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।