Rajya Sabha Election Result 2020 : धनंजय प्रताप सिंह भोपाल। नईदुनिया। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में दोनों सीटें जीत तो ली, लेकिन इस जीत के पीछे भी भाजपा के प्रबंधन की हार छिपी है। फ्लोर मैनेजमेंट में भाजपा को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा है। पिछले साल इन्हीं दिनों विधानसभा के बजट सत्र में भी एक विधेयक पर हुए मत विभाजन में भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कोल ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था।

एक बार फिर राज्यसभा चुनाव में भाजपा के अनुसूचित जाति के विधायक गोपीलाल जाटव द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के पक्ष में क्रास वोटिंग की गई। कई बार के विधायक जुगल किशोर बागरी का मत निरस्त होना भी सामान्य घटना नहीं है, बल्कि इसने भाजपा संगठन और सरकार की कमजोरी को उजागर कर दिया है। राज्यसभा चुनाव में भाजपा को दोहरी हार का सामना करना पड़ा है।

पहली, प्रबंधन के तमाम दावों के बाद भी कांग्रेस का वोट कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ गया। दूसरी,चंबल-ग्वालियर की 16 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस अपने अनुसूचित जाति के चेहरे फूलसिंह बरैया की हार को भाजपा के अनुसूचित जाति वर्ग के विरोधी चेहरे के रूप में प्रचारित करेगी। मध्य प्रदेश में तीन सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा हाईकमान भी बेहद गंभीर था।

यही वजह थी कि भाजपा ने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते सहित राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मप्र प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्घे और बीजे पांडा, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को विशेष तौर पर भोपाल में तीन दिनों के लिए भेजा था। इसके अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह जैसे प्रबंधन में माहिर लोग भी राज्यसभा चुनाव के लिए मोर्चा संभाल रहे थे।

फिर आखिर चूक कहां हुई? कहां असंतोष छिपा था? क्या माना जाए कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राज्यसभा चुनाव होते तो परिदृश्य कुछ और होता। या यूं कहें कि विस्तार के बाद भाजपा का संकट और बढ़ सकता है। इस सवाल का जवाब भाजपा को भी नहीं मिल रहा है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव कहते हैं कि अनुसूचित जाति के विधायक गोपीलाल जाटव जानबूझकर गलती करेंगे, ऐसा लगता नहीं है।

इधर, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा कह रहे हैं कि हमारे विधायक 107 हैं, जबकि हमें वोट 111 मिले हैं। वे कहते हैं कि हम जितना सोच रहे थे, उतने ही वोट मिले हैं। क्रास वोट की बात को खारिज करते हुए शर्मा कहते हैं कि हमारा एक वोट खारिज जरूर हुआ है। दरअसल, विश्वास और अविश्वास की बात इसलिए उठ रही है क्योंकि जाटव चूंकि गुना जिले से हैं और गुना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव हारे ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी थे। गुना जिले की ही राघौगढ़ सीट से कई बार विधायक रहे दिग्विजय सिंह इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी थे इसलिए सवाल भी उठना लाजमी है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस