भोपाल(नप्र)। जिंदगी के लिए एक माह से जंग लड़ रही बहादुर बेटी रति को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर छेड़ी गई मुहिम अंततः रंग लाई। वाट्स एप पर शुरू हुई मार्मिक आपीलों से द्रवित होकर एक सज्जन मालवा एक्सप्रेस में हुई लूटपाट के चश्मदीद बनकर सामने आ गए हैं। रति और उसके परिजनों से मिलने के बाद इस मामले में उन्होंने हर संभव मदद करने का संकल्प भी लिया है।

लूटपाट का विरोध करने पर चलती ट्रेन से फेंक दी गई रति त्रिपाठी की हालत में काफी सुधार है। चिकित्सकों ने उसके एक हफ्ते में पूरी तरह होश में आने की पूरी उम्मीद जताई है। लेकिन इस मामले में पुलिस अभी तक अपराधियों तक नहीं पहुंच पाई है। हालांकि इस वारदात में कई संदिग्ध बदमाशों को पुलिस ने चिन्हित को कर लिया है,लेकिन घटना का चश्मदीद नहीं होने से पुलिस को रति के पूरी तरह होश में आने का इंतजार है, ताकि उससे आरोपियों की शिनाख्त कराई जा सके।

मार्मिक अपीलें रंग लाईं

इस सनसनीखेज वारदात को सुलझाने के लिए रेलवे पुलिस और रति के परिजनों ने घटना के बाद सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। इसके तहत रति को न्याय दिलाने के लिए वाट्स एप पर लगातार मार्मिक अपीलें की जाती रहीं। इसके तहत 'यदि ऐसा आपकी बेटी के साथ होता तो आप क्या करते'। एक बहादुर लड़की जिंदगी के लिए लड़ रही है, उसके उदास परिजन परदेश में पड़े हैं, लेकिन अपराधी खुले घूम रहे हैं। यदि आप में किसी के भी के पास इस घटना के बारे में जानकारी हो तो कृपया मदद करें। रति के पिता महेंद्रनाथ त्रिपाठी ने बताया कि बेटी के लिए न्याय के लिए सबसे पहले मार्मिक अपील उन लोगों के मोबाइल फोन पर की गई, जो उस कोच में सवार थे। इसके बाद भोपाल, इंदौर, दिल्ली आदि शहरों में अनेक नंबरों पर संदेश भेजे गए।

सिर पर हाथ रखते ही रति की

आंखों से आंसू आने लगे

त्रिपाठी ने बताया कि अंततः मुहिम रंग लाई और एक सज्जन ने उनसे संपर्क कर बताया कि वह उस दिन उसी कोच में सफर कर रहे थे। इसके बाद वह हाल ही में भोपाल आए और बंसल अस्पताल में रति का हाल-चाल जानने पहुंचे। उन्होंने रति के सिर पर हाथ रखते हुए कहा बेटी मुझे पहचान गई होगी। रति ने आंखें खोली और उसकी आंख से आंसू बह निकले। इसके बाद उन्होंने रति के पिता से कहा कि घटना उनके सामने हुई थी। वह इस मामले में मदद के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

क्या हुआ था

रति त्रिपाठी दिल्ली से उज्जैन के लिए मालवा एक्सप्रेस के एस-7 कोच में बर्थ नंबर-8 पर सफर कर रही थी। 19 नवंबर बुधवार की सुबह करीब 5 बजे बीना के पहले करोंदा स्टेशन के पास बदमाशों ने उसका पर्स झपट लिया था। लूटपाट का विरोध करने पर लुटेरों ने रति को चलती ट्रेन से फेंक दिया था। इसके बाद आरोपी फरार हो गए।

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बंसल अस्पताल पहुंचकर परिजनों से मिला,

रति की सेहत के बारे में जानकारी ली

*-पूरी मदद का भरोसा जताया, रति ने भी पहचाना

*-न्याय के लिए रेलवे पुलिस, परिजनों ने सोशल मीडिया का लिया सहारा

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