भोपाल (नप्र)। एक माह से अस्पताल में भर्ती रति त्रिपाठी के परिजन उसके जल्द स्वस्थ होने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत दिल्ली में रति की फर्म में कार्यरत उसकी सबसे करीबी सहेली शैली से दिन में 3-4 बार फोन पर बात कराई जाती है। रति बोल तो नहीं पा रही, लेकिन कान में शैली की आवाज सुनाई देते ही वह रिलेक्स होने लगती है।

बंसल अस्पताल में दाखिल रति की सेहत में दिनों दिन तेजी से सुधार आ रहा है। उसके दिमाग की सूजन भी अब काफी कम हो गई है। इससे उसकी चेतना बढ़ गई है। नाम से पुकारने पर वह आंखे खोलकर देखती है। विजन थैरेपी के बाद अब उसकी आंखों की पुतलियां भी टीवी के फुटेज के हिसाब से मूवमेंट करती हैं। रति के पिता महेंद्रनाथ त्रिपाठी ने बताया कि रति दिल्ली के आईआईटियन पेस इंस्टीट्युट में काउंसर के पद पर रही है। वहां उसकी सबसे अच्छी सहेली शैली नाम की लड़की है। रति के साथ हुए हादसे से वह काफी दुखी हुई थी। लेकिन जब से उसे रति की सेहत में सुधार की जानकारी मिली, तब से वह दिन में 3-4 बार फोन कर रति से बात करवाने की गुजारिश करती है। नाक में भोजन के लिए नली और गले में कफ की निकासी के लिए नली लगी होने से रति बोल तो नहीं पाती, लेकिन शैली की आवाज कान में पहुंचते ही उसके चेहरे पर एक संतोष सा झलकने लगता है।

क्या हुआ था

रति त्रिपाठी दिल्ली से उज्जैन के लिए मालवा एक्सप्रेस के एस-7 कोच में बर्थ नंबर-8 पर सफर कर रही थी। 19 नवंबर बुधवार की सुबह करीब 5 बजे बीना के पहले करोंदा स्टेशन के पास बदमाशों ने उसका पर्स झपट लिया था। लूटपाट का विरोध करने पर लुटेरों ने रति को चलती ट्रेन से फेंक दिया था। इसके बाद आरोपी फरार हो गए।

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