- रेलवे पुलिस ने कुछ अपराधी चिन्हित किए, उनकी शिनाख्त होना बाकी

भोपाल (नप्र)। जीवटता से मौत को मात दे चुकी रति चलती ट्रेन में तीनों बदमाशों से बहादुरी के साथ भिड़ गई थी। जान आफत में फंसती देख लुटेरों ने रति के हाथ में दो जगह दातों से काट खाया था। पकड़ छूटते ही उन्होंने रति को ट्रेन से नीचे फेंक दिया था। लेकिन अफसोस और शर्म की बात यह रही कि 72 सीटों पर बैठे मुसाफिरों में से एक भी इस अकेली लड़की की मदद को सामने नहीं आया था। इस मामले में रेलवे पुलिस ने कुछ अपराधियों को चि-ति कर लिया है। उनकी शिनाख्त होना बाकी है।

एक माह से बंसल अस्पताल में भर्ती रति त्रिपाठी की चेतना काफी लौट आई है। यहां तक कि उसने इशारे से लूटपाट करने वालों की संख्या भी तीन बताई है। इस बात की पुष्टि भी अब होने लगी है। इससे उम्मीद बढ़ी है कि ठीक होते ही रति आरोपियों को पहचान लेगी।

सिर में लगे थे 22 टांके, चेहरे पर 7

रति के पिता महेंद्रनाथ त्रिपाठी ने बताया कि चलती ट्रेन से गिरने के कारण रति के सिर में पीछे की तरफ गंभीर चोट लगी थी। उसके लिए सिर में 22 टांके लगाना पड़े थे। इसी तरह चेहरे पर नाक के पास 7 टांके लगे हैं। दोनों घाव भर चुके हैं और टांके भी काट दिए गए हैं। रति के सीधे हाथ में कुहनी के नीचे और बांह पर दो जगह दांतों के जख्म हैं। यह जख्म बदमाशों ने खुद को रति की पकड़ से बचाने के लिए किए थे।

साथ ही रति के हाथों में नाखून की खरोंच के निशान भी मिले। संभवतः उसके हाथ की अंगूठियों को निकालते समय यह निशान बने हैं। हालांकि पुलिस के लिए दांतों के निशान आरोपियों की पहचान करने का एक पुख्ता जरिया भी बन गया है।

क्या हुआ था

रति त्रिपाठी दिल्ली से उज्जैन के लिए मालवा एक्सप्रेस के एस-7 कोच में बर्थ नंबर-8 पर सफर कर रही थी। 19 नवंबर बुधवार की सुबह करीब 5 बजे बीना के पहले करोंदा स्टेशन के पास बदमाशों ने उसका पर्स झपट लिया था। लूटपाट का विरोध करने पर लुटेरों ने रति को चलती ट्रेन से फेंक दिया था। इसके बाद आरोपी फरार हो गए।

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