-यूनिहोम्स रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का मामला, एफआईआर के बाद भी नहीं की कार्रवाई

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

राजधानी के बहुचर्चित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट यूनिहोम्स मामले पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यूनिहोम्स कोलाज ग्रुप भोपाल के संचालक बिल्डर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के मामले में कोलार थाना टीआई को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एचजी रमेश की एकलपीठ ने सरकार की रिपोर्ट से असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि 26 फरवरी को संतोषजनक जवाब नहीं पेश किया गया तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

वर्ष 2009 में यूनिहोम्स में फ्लैट्स खरीदारों से वादा किया गया था कि 24 से 36 माह में तैयार करके उन्हें उसका अधिपत्य दे दिया जाएगा। लेकिन 15 फीसदी खरीदारों को छोड़कर 85 फीसदी खरीदारों को आठ साल बाद भी फ्लैट नहीं मिला। अधिकतर लोगों ने अपने फ्लैट की 90 फीसदी तक राशि का भुगतान भी कर दिया है। लोगों का आरोप है कि जिन आठ टावर में 144 लोगों को फ्लैट का अधिपत्य दिया गया है, उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। कॉलोनी के रहवासी बिजली, पानी, बधाों का पार्क, सुरक्षा गार्ड आदि की सुविधाओं से वंचित हैं।

शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई

रहवासियों ने नवंबर 2017 और फरवरी 2018 में बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी की शिकायत थी, जिस पर कोलार थाने में दो एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। रहवासियों ने नगर निगम में शिकायत दर्ज कराई थी कि नगर पालिका के दौरान ही गलत तरीके से बंधक प्लाटों को बेच दिया गया। जिसकी जांच की मांग की थी। निगम अधिकारियों ने जांच का आश्वासन भी दिया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।

पुलिस बिल्डर्स के दबाव व प्रभाव में दबी

खरीदारों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पैरवी की। गुप्ता ने बताया कि मामले में 500 से अधिक लोगों के साथ धोकाधड़ी की गई। न्यायालय में उन्होंने इस बात को भी रखा की पुलिस बिल्डर के प्रभाव व दबाव के कारण 1 साल से कार्रवाई नहीं कर रही है। जबकि बिल्डर कंपनी संचालकों द्वारा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए लगाई गई याचिका पहले ही खारिज की जा हो चुकी है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी तो दूर बल्कि पुलिस ने जांच कार्रवाई तक नहीं की। न्यायालय में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मामले पर कार्रवाई की जा रही है। उधर कोर्ट ने दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने जांच अधिकारी टीआई को व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए।

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