भोपाल। नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। मध्यप्रदेश विधानसभा ने शुक्रवार को संविधान के 126वें संशोधन विधेयक का अनुसमर्थन करने वाले संकल्प को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस संशोधन के जरिए अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षण व्यवस्था अगले दस साल आगे बढ़ाने का प्रावधान है। हालांकि, संकल्प में सरकार ने एक सुझाव जोड़ दिया कि एंग्लो इंडियन को भी विधानसभा में मनोनीत करने का प्रावधान बरकरार रखा जाए। विपक्ष ने इस पर आपत्ति उठाई और कहा कि राज्य को संविधान संशोधन के अनुसमर्थन संबंधी संकल्प में इस तरह का अधिकार नहीं है। जबकि, संसदीय कार्यमंत्री डॉ.गोविंद सिंह ने कहा कि एंग्लो इंडियन भी पिछड़े हैं। संकल्प पारित होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्तिकाल के लिए स्थगित हो गई।

भाजपा के वरिष्ठ विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आपकी नीयत साफ नहीं लगती है क्योंकि आप संकल्प शर्त के साथ लाए हैं। यह भ्रम पैदा करने की कोशिश है क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक में इस तरह का प्रावधान नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने चिंता जताई कि 70 साल बाद भी आरक्षण बार-बार बढ़ाए जाने की प्रक्रिया होती है। 35 साल में जापान बन गया और हम अजा-अजजा को बराबरी पर नहीं ला पाए। सिस्टम में कहीं न कहीं गड़बड़ी है। वहीं, कांग्रेस की ओर से कांतिलाल भूरिया ने कहा कि कांग्रेस ने यह अधिकार दिया है। आपके (भाजपा) समय में तो इसे पहले खत्म करने का प्रयास हुआ था।

इस पर विपक्ष ने तीखा विरोध दर्ज कराया। वहीं, विपक्ष के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुंभ में सफाईकर्मियों के पैर धोने सहित कुछ अन्य बातों को उठाने पर मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, डॉ.विजयलक्ष्मी साधौ, ओमकार सिंह मरकाम, कमलेश्वर पटेल और भाजपा के वरिष्ठ विधायकों के बीच तीखा संवाद भी हुआ, जिसे अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने विलोपित करा दिया।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि यह एक ऐसा संशोधन है जो संसद के दोनों सदनों से सर्वसम्मति से पारित हुआ। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने जब यह प्रावधान दस साल के लिए किया था तब उनकी सोच थी कि इस अवधि में इनका उद्धार होगा पर 70 साल से हम सब मिलकर दस साल बढ़ाते रहे।

इसमें किसी सरकार या दल की बात नहीं है। संसदीय कार्यमंत्री डॉ.सिंह ने कहा कि 25 जनवरी 2020 को अजा-अजजा आरक्षण की अवधि समाप्त हो रही है। इसमें एंग्लो इंडियन सदस्य लोकसभा और विधानसभाओं में मनोनीत करने का प्रावधान नहीं किया है। ये भी पिछड़े में आते हैं। हमने राज्यपाल को एंग्लो इंडियन सदस्य मनोनीत करने का प्रस्ताव दिया है लेकिन अनुमति नहीं मिली। चर्चा के बाद संकल्प को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

दस साल बाद मैं तो यहां नहीं होऊंगा: मुख्यमंत्री

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हर दस साल में हम इस प्रावधान को बढ़ाते रहे हैं। दस साल बाद भी हम यहां बैठेंगे। आप तो होंगे पर मैं तो यहां नहीं होऊंगा। इस पर भाजपा के रामेश्वर शर्मा ने कहा कि ऐसी क्या बात है। विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने बात को संभालते हुए कहा कि विषय वह नहीं है। वह बोल रहे हैं कि हम यहां नहीं दिल्ली में रहेंगे। इस पर हंसते हुए कमलनाथ ने शर्मा की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि आप असली मायने तो समझे नहीं। शर्मा ने भी जवाब देते हुए कहा कि बहुत से लोग दिल्ली भेजना चाहते हैं पर अभी क्यों दिल्ली जाएं। मध्यप्रदेश में आए हैं तो यहां रहें।

Posted By: Hemant Upadhyay

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