काव्य गोष्ठी के साथ भाषा एवं साहित्य उत्सव का समापन

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिंदी भवन की ओर से आयोजित सात दिवसीय हिंदी भाषा एवं साहित्य उत्सव का समापन काव्य गोष्ठी के साथ हुआ। इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता इंदौर के कवि प्रो. सरोज कुमार ने की। भोपाल के युवा कवि चित्रांश वाघमारे ने गोष्ठी की शुरुआत करते हुए अपनी कविता 'कुछ बातें मन में रहने दो, गीतों में ढलना मुश्किल है। सबको सहज नहीं लगता है, दुख को अपना मीत बनाना।' दिल्ली के कवि विज्ञान व्रत ने श्रृंगार रस की रचना 'जो पानी पर आग हो, छांव पहन ले धूप, सागर पर चेहरा दिखे, ऐसा तेरा रूप।' इसी प्रकार लक्ष्मीनारायण पयोधि ने अपनी कविता 'फिर से पुष्प की भाषा ने पुकारा उसे, कि पराग के झड़ने से पहले सौंप दूं अपनी आत्मा की सुगंध।' के माध्यम से भाषा का समर्पण व्यक्त किया। गीतकार नरेंद्र दीपक ने प्रेम की कविता में जीवन की हताशा और निराशा को स्वर देते हुए गाया 'वैसे तो भीड़ में ही ज्यादा रहे हैं हम, यह और बात है कि तन्हा रहे हैं हम। दो-चार प्यार कुल जमा है यादाश्त में, उनमें भी पर कटा सा परिंदा रहे हैं हम।'

अग्निशेखर का पंक्तियां थीं 'सब तरफ बर्फ है खामोश, जले हुए हमारे घरों से, ऊंचे हैं यह पत्ते, पेड़'। कार्यक्रम में कवियत्री ममता बाजपेई,वीरेंद्र निर्झर,दिनेश प्रभात, सुरेश चंद्र शुक्ल भी शामिल हुए ।

Posted By: Nai Dunia News Network

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