रवींद्र भवन में आयोजित युवा उत्सव में सजी सुखन-उर्दू अदब और सूफी संगीत की महफिल

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

रवींद्र भवन में शनिवार की शाम सूफियाना हो उठी। जहां इश्क-मुश्क के जरिए मन की बात कुछ कही कुछ सुनी। देर शाम तक चलती रही इस शानदार महफिल में श्रोता वाह-वाह करते रहे। दरअसल,

विश्वरंग अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के 'युवा उत्सव' के दूसरे दिन 'सुखन सूफियाना बैंड' की महफिल सजी। उर्दू अदब और सूफी संगीत की महफिल में अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से भोपाल की शाम को खुशनुमा बना दिया। लगभग 2 घंटे की महफिल में सूफ़ी संगीत, उर्दू अदब और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से मंच सराबोर हुआ। उर्दू की दास्तानगोई शैली, नमों, गजलों की नुमाइंदगी और क़व्वाली, उर्दू गद्य और शायरी के अंदाज से इस महफिल में एक अलग ही समां बांधा।

तुम्हारा फोन आया है...

कार्यक्रम की शुरुआत पियूष मिश्रा के गीत हुस्ना... से की। इसके बाद फ़ैज अहमद फ़ैज लिखित कुछ इश्क किया कुछ काम किया..., और जावेद अख्तर रचित मैं और मेरी आवारगी..., सुनाया तो श्रोता वाह वाह कर उठे। इस क्रम में मग्लूब पूनावाला का लिखा कलाम गलती मेरी दिखे है तुमको हिजाब में क्या...की प्रस्तुति दी। इसके बाद कुमार विश्वास की लिखी नज्म तुम्हारा फोन आया है... को म्यूजिकल अंदाज में पेश किया। सुखन में 12 कलाकार मंच पर रहे। सुखन सूफियाना बैंड अपनी प्रस्तुति को 'महफिल' कहते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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