भोपाल। Roti Bank मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रेलवे स्टेशन, सुल्तानिया व हमीदिया अस्पताल और रैन बसेरा के आसपास रात को भूखे पेट सोते सैकड़ों लोगों को देखा जा सकता है। हर रोज इन लोगों को भूखे न सोना पड़े इस बात की चिंता ने पांच युवकों को सोने नहीं दिया। करीब 2 साल पहले इन युवकों ने भारत टॉकीज स्थित सेंट्रल लाइबे्ररी में एक रोटी बैंक खोला है। यहां हर रोज आने वाले युवक एक-एक रोटी अपने लंच बॉक्स में ज्यादा लेकर आते हैं और बॉक्स में डालते हैं। एक हजार रोटी हर रोज इकट्ठा होने के बाद उसे युवक रात में बांटने भी निकलते हैं। रोटी बैंक को रचित मालवीय, विष्णु पंथी, आलोक तिर्की, विवेक श्रीवास्तव, शोभित सिंह ने शुरू किया है। सभी सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं।

इसलिए शुरू किया रोटी बैंक

रोटी बैंक के आलोक तिर्की ने कहा कि हम सभी कई सालों से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। एक दिन पढ़ाई के दौरान पता चला कि देश में 19 करोड़ लोगों को शाम का भोजन नसीब नहीं होता है। उन्हें भूखे सोना पड़ता है। इस बात पर हम सभी युवाओं ने चिंतन किया और रोटी बैंक शुरू किया। इसके बाद इससे सभी जुड़ने लगे।

लाइब्रेरी में आने वाले युवकों को जोड़ा जा रहा है

इस लाइब्रेरी में करीब 800 युवा सदस्य हैं। सभी हर रोज एक-एक रोटी बॉक्स में डालते हैं। इस अभियान में लाइब्रेरी के प्रबंधक भी सहयोग करते हैं। पांच युवाओं से शुरू हुए इस अभियान में अब तक करीब 50 युवा जुड़ गए हैं। इनकी जिम्मेदारी भूखे लोगों को एक समय का भोजन उपलब्ध कराना है।

सस्ता भोजन बंद होने से बढ़ी चिंता

रोटी बैंक से जुड़े रचित मालवीय, जो लाइब्रेरी में संविदा पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं को भी पढ़ाई के दौरान घर से बाहर रहने पर कई बार भूखे सोना पड़ता है। पहले सरकार द्वारा 5 रुपए में भोजन दिया जाता था, अब उसके बंद होने से रैनबसेरा, हमीदिया व सुल्तानिया अस्पताल, रेलवे स्टेशन के आसपास भूखे पेट सोने वालों की तदाद बढ़ गई है। इन्हीं क्षेत्रों में रोटियों को बांटने का कार्य किया जाता है।

पैसा इकट्ठा कर सब्जी भी देते हैं

रोटी बैंक से जुड़े युवा बेरोजगार जरूर हैं, लेकिन उन्हें भूखे सोते लोगों की चिंता है। वे सभी 5 से 10 रुपए का कलेक्शन कर सब्जी खरीदकर रोटी के साथ वितरण करते हैं।

जब लाइब्रेरी के युवाओं ने इस सामाजिक कार्य के लिए बॉक्स लगाने की बात की तो सभी ने इसमें सहयोग दिया। युवा इस कार्य से जुड़कर सामाजिक बन रहे हैं। -डॉ. वंदना शर्मा, श्रेत्रीय ग्रंथपाल, सेंट्रल लाइब्रेरी

Posted By: Nai Dunia News Network

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