भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

नाव पर सवार युवकों के मुताबिक दो नाव में मूर्ति के साथ 17 युवक और दो नाविक मौजूद थे। तालाब में मूर्ति विसर्जित करते वक्त पीछे से धक्का देने के दौरान मूर्ति आगे की ओर न जाकर बांयी ओर झुक गई। एक नाव में पानी भरा गया तो इस पर सवार लोग दूसरी नाव पर चढ़ गए। क्षमता से अधिक लोग सवार होने की वजह से इस नाव का भी संतुलन बिगड़ गया और वह डूब गई। तभी वहां पर पहले से मौजूद एक अन्य नाविक डूबते हुए युवकों को बचाने पहुंचा। पानी में डूब रहे युवक उस नाव के पिछले हिस्से में चढ़ने लगे। इस कारण वह नाव भी पानी भराने के कारण पलट गई और उस प चढ़े लोग भी तालाब में गिर गए। इसी बीच उक्त नाव के नाविक ने भी कूद कर अपनी जान बचाई।

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परवेज को बचाने उसका हाथ पकड़ा, लेकिन फिसल गया

मैनें परवेज को अपनी आखों से डूबते देखा तो उसका हाथ थामने की कोशिश की, लेकिन उसका हाथ मेरे हाथ से फिसल गया। इसी दौरान दूसरी नाव भी पास आ गई। इसमें मेरे समेत अन्य छह लोग चढ़ गए। इससे हमारी जान बच गई। करीब दो घंटे की देरी से गोताखोर आए। तब तक सबकुछ समाप्त हो चुका था। जब हम घाट पर पहुंचे तो न तो वहां लाइफ जैकेट मौजूद थी, न प्रशासन की नाव हमें दिखाई दी।

नितिन मकोरिया, हादसे के वक्त नाव पर सवार युवक

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नाविक बना भगवान

एक नाविक मेरे लिए भगवान साबित हुआ। उसने नाव को पकड़ लिया। नाविक ने उसे और उसके एक साथी को पानी से नाव पर खींच लिया। इस दौरान एक अन्य समिति के दो युवकों ने भी तत्काल पानी में छलांग लगाते हुए डूब रहे चार लोगों को बचा लिया। राणा के मुताबिक हादसे होने के काफी देर बाद तक घाट पर मौजूद किसी तरह की सरकारी मदद नजर नहीं आई। राणा का आरोप है कि यदि गोताखोर और बचाव दल के लोग मौके पर मौजूद रहते तो सभी की जान बचाई जा सकती थी।

- कमल राणा, हादसे के वक्त नाव पर सवार युवक

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नाव का कुछ हिस्सा टूट गया था

दो नावों को जोड़कर उस पर गणेश मूर्ति को रखा गया था। मूर्ति का वजन इतना ज्यादा था कि कुछ ही देर में एक नाव का कुछ हिस्सा टूट गया फिर देखते ही देखते मूर्ति का संतुलन बिगड़ गया और वो पानी में गिर गई। इससे घबरा लोग दूसरी नाव पर सवार होने लगे तो वो भी डूब गई। इसी दौरान वहां एक और मौजूद नाव में कुछ लोग सवार हो गए। यदि घाट पर गोताखोर मौजूद होते तो डूबे लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

शुभम कुश्वाह, प्रत्यक्षदर्शी

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घाट पर ही नाव हिलने लगी तो मैं उतर गया

मैं भी मूर्ति विसर्जन करने अपने दोस्तों के साथ गया था। आरती के बाद मूर्ति को जब दो नावों पर रखा गया तो मैं भी अपने दोस्तों के साथ नाव पर सवार हो गया। इस दौरान दोनों नाव पर करीब 20 लोग सवार थे। तभी नाव हिलने लगी तो मैं डर गया और नाव से उतर गया। नाव से उतरने के बाद मैं घाट पर बैठा रहा। तभी अचानक पहले मूर्ति गिरी और नाव को डूबते देखा तो मैं बहुत घबरा गया। कुछ सेकंड के भीतर दोनों नाव पूरी तरह डूब गई। घाट पर तैनात कोई पुलिसकर्मी मदद के लिए आगे नहीं आया। वे सिर्फ बचाव बचाव चिल्लाते रहे। वहां कोई गोताखोर भी मौजूद नहीं थे।

आकाश पिपरैया, प्रत्यक्षदर्शी

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