भोपाल। भोपाल लोकसभा सीट जीतकर भारतीय जनता पार्टी ने भगवा आतंकवाद जैसे फर्जी आरोपों को गढ़ने वाले कांग्रेस के सबसे बड़े नेता दिग्विजय सिंह से सियासी बदला तो लिया ही, साथ में कांग्रेस की वोट बैंक पॉलिटिक्स का जवाब भी दे दिया। सिंह ने ही मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को आरोपी बनाए जाने पर भगवा आतंकवाद जैसे फर्जी आरोप लगाए थे। अदालत ने इन आरोपों को पहले ही खारिज कर दिया था और अब जनता की अदालत में भी दिग्विजय को साध्वी के हाथों परास्त कर भाजपा ने भगवा आतंकवाद जैसे आरोपों का बदला ले लिया।

भोपाल पर टिकी थी देशभर की नजर

वैसे तो देश की 543 लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहा था लेकिन सभी की नजर भोपाल के चुनाव पर टिकी थी। इसकी वजह साफ थी कि यहां दो नेताओं या दो दलों के बीच लड़ाई नहीं हो रही थी बल्कि दो विचारधाराओं की लड़ाई थी। एक विचारधारा के केंद्र में हिंदुत्व था तो दूसरी तरफ हिंदुत्व की गलत व्याख्या करने पर दिग्विजय सिंह निशाने पर थे। पूरे चुनाव में मुद्दे गायब रहे,चर्चा सिर्फ इस बात की थी कि हिंदुत्व को जिंदा रखना है या उसकी खिलाफत करने वालों को जिताना है। दिग्विजय सिंह भी पूरे चुनाव में खुद को सबसे बड़ा हिंदू साबित करने में जुटे रहे। मंदिर-मंदिर घूमने के अलावा उन्होंने साधु-संतों का भी सहारा लिया। यज्ञ-हवन से लेकर एक-एक समाज की बैठकें ली, पर आरोपों को धो पाने में सफल नहीं हुए।

आस्था की प्रयोगशाला बन गया था भोपाल

कुल मिलाकर भोपाल एक ऐसी प्रयोगशाला बन गया था जहां आस्था और धर्म की लड़ाई पर फैसला होना था। प्रज्ञा ने भी इसे धर्म के खिलाफ अधर्म की लड़ाई बताया और ऐसा माहौल बनाया कि झूठे भगवा आतंकवाद के नाम पर उसे बेहद प्रताड़ित किया गया। प्रचार में साध्वी ने आतंकी हमलों में शहीद महाराष्ट्र के पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे को दिग्विजय के इशारे पर खुद को टार्चर करने की कहानी सुनायी तो करकरे की मौत श्राप से होना बताया। बाबरी मस्जिद के ढांचे को अपने हाथों से गिराना उपलब्धि बताया। हर सभा में कहा कि उनकी नजर में यह चुनावी मुकाबला नहीं, एक धर्म युद्ध है और दिग्विजय सिंह अधर्मी हैं।

इनका कहना है

भोपाल में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के नाम की घोषणा के साथ ही भाजपा ने छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों को जवाब देने की रणनीति बनाई। इसी उद्देश्य से साध्वी प्रज्ञा सिंह को प्रत्याशी बनाया गया ताकि हिंदू आतंकवाद की फर्जी अवधारणा देकर भारतीय परम्परा और समाज को बदनाम करने वाली तुष्टिकरणवादी ताकतों को माकूल जवाब दिया जा सके। चुनाव में निश्चित तौर पर इसका सकारात्मक परिणाम हुआ है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा वाले लोग देशभर में जीते हैं और विभाजनकारी और तुष्टिकरणवादी ताकतें निर्णायक रूप से पराजित हुई हैं। भोपाल संसदीय क्षेत्र की इस विचाराधारा की लड़ाई में अग्रणी भूमिका रही है।

डॉ दीपक विजयवर्गीय, मुख्‍य प्रदेश प्रवक्‍ता

यादव को उपचुनाव में तैयारी करने कहा,फिर टिकट नहीं दिया

गुना-शिवपुरी संसदीय सीट में जिस भाजपा प्रत्याशी केपी यादव ने कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पराजित किया, दरअसल वह ज्यादा पूराना विवाद नहीं था। हुआ यूं कि लोकलेखा समिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद सिंधिया ने केपी यादव को मुंगावली सीट से उप चुनाव की तैयारी करने के लिए बोल दिया था।

इस बीच गोविंद सिंह राजपूत की सलाह पर उन्होंने बृजेंद सिंह यादव को प्रत्याशी बना दिया। केपी यादव टिकट काटे जाने से बेहद नाराज थे इसी नाराजी का फायदा भाजपा ने उठाया और केपी यादव को पार्टी में शामिल कर लिया। उपचुनाव में तो भाजपा ने केपी यादव को टिकट नहीं दी लेकिन विधानसभा चुनाव 2018 में मुंगावली से भाजपा ने उन्हें चुनाव लड़ाया था। यादव चुनाव हार गए। पार्टी ने फिर उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में उतारा तो उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु सिंधिया को पटकनी देकर अपने अपमान का बदला ले लिया।

Posted By: Hemant Upadhyay

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