धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। नईदुनिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घर-घर बिजली पहुंचाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना 'सौभाग्य" मध्य प्रदेश में न सिर्फ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई बल्कि सौ फीसदी मीटरिंग का दावा करने के बाद भी पांच लाख से ज्यादा घर ऐसे हैं जहां बिजली पहुंची ही नहीं।

राज्य सरकार ने इसकी छानबीन की तो छह महीनों की कवायद के बाद ये जानकारी एकत्र हो पाई कि सौ फीसदी मीटरिंग के दावे के बाद भी योजना का मकसद पूरा नहीं हो पाया है। पांच हजार करोड़ खर्च होने के बाद अब मात्र पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी ने 569 करोड़ रुपए की मांग और की है। तीनों कंपनी का खर्च लगभग 15 सौ करोड़ होने का अनुमान है।

चौकाने वाली बात ये है कि पिछली सरकार ने प्रदेश में सौ फीसदी गांव तक बिजली पहंुचाने का दावा किया था। गौरतलब है कि सौभाग्य योजना में कई तरह की गड़बड़ियां पहले सामने आ चुकी है। डिंडौरी-मंडला में 10 करोड़ रुपए की वसूली के साथ 9 इंजीनियरों को निलंबित किया गया है। इन सारे घोटाले को 'नईदुनिया" द्वारा उजागर किया था। इसके बाद विधानसभा में मामला उठा और सरकार ने सभी जिलों में सौभाग्य योजना की गड़बड़ियों की जांच कराने का एलान किया था।

नौ महीने में आई जानकारी

सौभाग्य योजना में हुई गड़बड़ियों के उजागर होने के बाद जब मई 2019 में राज्य सरकार ने बिजली कंपनियों से पूछा कि कितने गांव, मजरे-टोले या बसाहटों में बिजली नहीं पहुंची तो जानकारी जुटाने में बिजली कंपनियों ने नौ महीने का वक्त निकाल दिया।

अब जानकारी आई तो पता चला कि सिर्फ पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 1 लाख 19 हजार 787 घरों में बिजली नहीं पहुंची है। 21 जिलों के 13 हजार 718 मजरे-टोले ऐसे हैं, जहां अब बिजली पहंचाने के लिए 559 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी। तीनों कंपनी का खर्च 1500 करोड़ से ज्यादा आने का अनुमान है।

पुराने ट्रांसफार्मर लगाए

डिंडौरी और मंडला में दीनदयान योजना के पुराने ट्रांसफार्मर को निकालकर सौभाग्य योजना में लगा दिया गया। इसका भुगतान भी कर दिया। कई जिलों में सौभाग्य योजना के पोल और ट्रांसफार्मर बारिश के कारण गिर गए थे। जांच में पता चला कि पोल लगाने में कांक्रीट का इस्तेमाल ही नहीं किया गया था। कई जगह तो चोरी के ट्रांसफार्मर लगाने की शिकायत की भी जांच चल रही है।

जांच किससे कराए, तय नहीं कर पा रही सरकार

'सौभाग्य योजना" में मध्य प्रदेश में इतनी ज्यादा गड़बड़ियां हुई हैं कि सरकार जांच करने में खुद को असहाय महसूस कर रही है। अब तक की जांच में नौ इंजीनियरों से 12 करोड़ रुपए की रिकवरी के आदेश दिए जा चुके हैं। जांच का दायरा दो जिलों से बढ़कर लगभग 20 जिलों तक फैल चुका है।

इसमें मैदानी गड़बड़ियों के साथ वित्तीय अनियमितताएं भी ज्यादा हुई हैं। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि इस जांच को किसी स्वायत्त समिति के हवाले कर दिया जाए या किसी सेवानिवृत्त महालेखाकार के नेतृत्व में एक टीम बनाकर जांच का जिम्मा सौंपा जाए।

मंत्री ने तलब की फाइल

ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने सारे मामले की जानकारी तलब की है। सिंह ने कहा कि एक बार फाइल का अध्ययन करने के बाद अगली कार्रवाई तय करेंगे।

Posted By: Hemant Upadhyay