भोपाल नवदुनिया प्रतिनिधि।

यूनिसेफ और नाइन इज माईन के साथ मिल कर गैर सरकारी संगठनों ने प्रदेश में जलवायु परिवर्तन पर अनुशंसाओं के लिए राज्य बाल संसद का आयोजन किया। बाल संसद में बच्चों ने जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए मांगों का चार्ट तैयार किया और जिम्मेदारों के साथ आॅनलाइन संवाद में अपनी मांगों के इस चार्ट को प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर बाल आयोग सदस्य ब्रजेश चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि बहुत अधिक प्रभावित होती है। जल स्रोत सूख रहे हैं और पानी की कमी हर जगह देखी जा रही है। ऐसे समय में जलवायु परिवर्तन पर बच्चों का बात करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम बड़ों को उनकी बात सुननी चाहिए। बच्चों को अपने विचार और सिफारिशें साझा करते हुए देख कर उन्हें बहुत संतोष हुआ है। इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि यूनिसेफ और नाइन इज माईन ने बच्चों को जलवायु परिवर्तन पर अपनी बात रखने में सक्षम बनाया है और उन्हें अभिव्यक्ति साझा करने का अवसर दिया है। वहीं भाजपा नेता पंकज चतुवेर्दी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित मांगों के चार्टर को बच्चों ने अच्छे से बनाया है और प्रस्तुत किया है। हमें स्कूली पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन को एक विषय के रूप में शामिल करना चाहिए। बहुत कम उम्र से बच्चों को पर्यावण संरक्षण के बारे में पढ़ाना शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलवायु कानूनों को जानना और सरकार को इसे प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद करना सभी के लिए महत्वपूर्ण है।

इस संवाद में चाइल्ड राइट आॅर्ब्जवेटरी की अध्यक्ष निर्मला बुच ने कहा कि आज हम जलवायु परिवर्तन पर मांगों के पत्र को साझा करते हुए बच्चों की बात सुन रहे हैं। हम इसको गंभीरता से लें क्योंकि बच्चों की आवाज को सुनने और नीति निमार्ताओं तक उनकी बात पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी है।

बच्चों की बातों को सुनना जरूरी

प्रत्येक संस्था के निदेशक स्टीव रोचा ने कहा कि बच्चों की आवाज सुनी जानी चाहिए ताकि उनके लिए बेहतर भविष्य बन सके। पृथ्वी के अधिकार के बिना बाल अधिकारों का कोई अर्थ नहीं है। अगर कोई आपदा आती है, तो वह सभी रूप में बच्चों को प्रभावित करती है और उनके अधिकारों का उल्लंघन होता है। कोंडरिया की सरपंच अनुराधा जोशी, सरपंच, ने कहा कि हम ग्रामीण स्तर पर लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे अधिक से अधिक पेड़ लगाए, प्लास्टिक उपयोग न करें और पुन: उपयोग करें, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन के लिए कुछ कदम उठाए। इसी तरह, सभी स्तरों पर और व्यक्तिगत स्तर पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संभव कदम उठाए जाना चाहिए। यूनिसेफ की ओर से अनिल गुलाटी ने कहा कि निर्णय लेने के स्तर पर बच्चों की आवाज को पहुंचाने के लिए हम सब को सक्रिय होना चाहिए। इस दौरान बाल प्रतिनिधि श्रेयांश, अनन्या और पूनम ने कहा कि भविष्य में आपदाओं को रोकने के लिए, हमें अब कार्रवाई करनी चाहिए। इसके पहले कि बहुत देर हो जाए हमें जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की दिशा में छोटे कदम उठाने शुरू कर देना चाहिए।

Posted By: Ravindra Soni

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