दारोगा जी : लोगों के चेहरे और कद देखकर मुंह खोलने वाले भारतीय पुलिस सेवा के कुछ साल पुराने अफसर कुछ दिनों से काफी परेशान थे। वह रेमडेसिविर इंजेक्शन की तलाश कर रहे थे। उनकी एक दोस्त के पिता को कोरोना संक्रमण ने घेर लिया था, लेकिन इंजेक्शन का जुगाड़ नहीं हो पा रहा था। जब उनकी दोस्त ने उनसे मदद मांगी तो उन्होंने राजधानी के एक अफसर से लेकर ग्वालियर तक में अपने परिचित को फोन लगाकर इंजेक्शन की व्यवस्था करने का हुक्म दिया। काफी कोशिश के बाद इंजेक्शन तो मिले, लेकिन दलाल पैसे मांग रहा था। साहब ने अपने पुराने धाकड़ टीआइ को फोन घनघनाया और दलाल से इंजेक्शन लेकर अपनी दोस्त तक पहुंचा दिए। बाद में दलाल की पुलिसिया अंदाज में खबर लेकर उसे अहसास दिलाया गया कि हर जगह दलाली करना अच्छी बात नहीं होती है। साहब अभी पुलिस कप्तानी के लिए काफी समय से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मामला जम नहीं रहा है।

साहब ने छिपा ली संक्रमित होने की बात

राजधानी के पास के जिले के एक पुलिस अफसर ने अपने जिले में तैनाती के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। किस्सा कुछ ऐसा है कि साहब भी कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आ गए और खुद को बीमार कर बैठे। बुखार और तेज सर्दी ने उनको परेशान कर दिया। उन्होंने भी जिले के एक सीनियर डॉक्टर को घर बुलाकर बीमारी के बारे में बताया। अफसर ने डॉक्टर साहब से इलाज कराने के बाद उनको समझाया कि उनका संक्रमण रुक जाना चाहिए और उनके संक्रमित होने की खबर फैलना नहीं चाहिए। डाक्टर साहब ने भरोसा दिलाया कि कोई उनसे पूछेगा तो वह झूठ नहीं बोलेंगे। अंदर की खबर यह है कि साहब को ऐसा लग रहा था कि कहीं उनको जिले से न हटा दिया जाए। सुकून की बात यह है कि साहब अब बिल्कुल स्वस्थ हैं और दुकानें बंद करा रहे हैं।

चालान काटकर निकाली खुन्नस

राजधानी के सबसे स्मार्ट पुलिस अफसर होने का दावा करने वाले एक इंस्पेक्टर साहब दवा स्टोर वालों से खफा हो गए हैं। उनकी अपने रिश्तेदारों के सामने इन दवा दुकान वालों ने किरकिरी करा दी। हुआ यह कि पुराने शहर के एक टीआइ साहब के इलाके में दवा दुकानों का मार्केट है, जहां रेमडेसिविर इंजेक्शन कुछ दिनों से आराम से मिल रहा था। थाने की पुलिस सुरक्षा इंतजामों के साथ इंजेक्शन भी बंटवा रही थी, लेकिन कुछ दिन पहले इंस्पेक्टर साहब के रिश्तेदार कोरोना संक्रमित हो गए। जब उनको इंजेक्शन की जरूरत पडी तो उम्मीद भरी नजरों से रिश्तेदार ने पुलिस इंस्पेक्टर को फोन कर कहा कि कुंवर साहब इंजेक्शन की व्यवस्था करा दो। कुंवर साहब ने 'हां' बोल दिया। लेकिन इंस्पेक्टर साहब जब दवा दुकान पर इंजेक्शन लेने पहुंचे तो उसने हाथ खड़े कर दिए। इस पर टीआइ तमतमा गए और दवा दुकानों के बाहर खड़े वाहनों का चालान करवा दिया।

सिंघम बीमार और बिकने लगी शराब

राजधानी पुलिस के सिंघम को कोरोना संक्रमण ने जकड़ लिया है। इसके कारण वह बीमार हो गए और घर पर आराम कर रहे हैं। पिछली बार लगातार गश्त के बावजूद कोरोना उनको छू नहीं पाया था, लेकिन इस बार वह कोरोना संक्रमित हो गए। उनके स्थान पर उनके ही थाने के एक एसआइ को कमान सौंप दी गई। उनके टू आइसी बनने के बाद आसपास गांवों में शराब की तस्करी ने जोर पकड़ लिया है। सीहोर के रास्ते से आने वाली शराब उनके थाने के सामने से गुजर जाती है, लेकिन उनको खबर तक नहीं लगती है। थाने की कमान उनके हाथ आने के बाद थाने के कई पुलिसकर्मी इसका फायदा उठाकर शटर उठवाकर किराना दुकानों के साथ शराब भी बिकवा रहे हैं। अंदर की बात यह है कि नए टू आइसी को मोबाइल से ही फुर्सत नहीं है। वह इंटरनेट मीडिया पर ही अधिकांश समय गुजारते हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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