भोपाल। मध्य प्रदेश की जेलों से गंभीर किस्म के अपराधों के बंदियों की फरार होने की घटनाएं साल-दो साल से लगातार हो रही हैं। भोपाल सेंट्रल जेल से सिमी आतंकियों के फरार होने और एनकाउंटर में मारे जाने की घटना के बाद प्रदेश की सेंट्रल जेलों में सीसीटीवी, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, अंडा सेल जैसे सुरक्षा इंतजाम किए गए, लेकिन जिला जेलें अभी भी बदहाल हैं। नीमच जिला जेल से दस साल में दूसरी बार गंभीर किस्म के अपराधी जेल तोड़कर भागे हैं। यहां सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। साथ ही ढाई साल से जेलर जैसे महत्वपूर्ण अधिकारी की पदस्थापना ही नहीं हुई है।

छह महीने पहले भर्ती होने वाली एक सहायक जेल अधीक्षक रंभा चौहान की यहां पदस्थापना की गई है जिससे बंदियों की जांच में गंभीर चूक के कारण लोहे की सामग्री लगातार पहुंची। 2009 में भी नीमच जिला जेल से गंभीर अपराधों में बंद पांच सजायाफ्ता कैदी जेल तोड़कर भाग गए थे। तब तत्कालिक जेल अधीक्षक शशिभूषण शरण को निलंबित कर दिया गया था। दस साल बाद रविवार को सुबह फिर वैसी ही घटना हुई। सूत्र बताते हैं कि नारकोटिक्स एक्ट जैसे अपराध में बंदी इस जेल में पहुंचते हैं।

सिमी आतंकियों ने दो बार तोड़े जेल

मप्र में जेल ब्रेक की सबसे गंभीर घटना भोपाल सेंट्रल जेल में 30-31 अक्टूबर 2016 की दरमियानी रात हुई थी। इसमें सिमी आतंकियों ने एक जेल कर्मचारी रमाशंकर यादव की हत्या की थी। बाद में आठों फरार बंदी पुलिस एनकाउंटर मारे गए थे। इस घटना के पहले खंडवा जेल से भी सिमी सरगना अबू फैजल, जाकिर हुसैन, मेहबूब, एजाजुद्दीन और असलम सहित छह लोग फरार हुए थे। इन लोगों ने फरार होने के बाद दो जवानों पर चाकू से हमलाकर उनकी रायफल व मोटर साइकिल लूट ली थी। हालांकि तीन महीने बाद सेंधवा से अबू फैजल तो गिरफ्तार हो गया था। तीन अन्य तेलंगाना में एनकाउंटर में मारे गए थे।

नरसिंहपुर-मुरैना की जेल से भी भागे बंदी

चार साल के भीतर नरसिंहपुर और मुरैना की जेलों से भी तीन बंदी जेल तोड़कर भागे हैं। मुरैना में फरवरी 2017 में एक-एक बंदी दो बार भाग चुके हैं तो नरसिंहपुर जेल से जुलाई 2015 में एक बंदी दीवार फांदकर भाग चुका है। सूत्रों के मुताबिक 2001 से 2015 के बीच मप्र की जेलों से 28 अपराधियों के जेल तोड़कर भागने की घटनाएं हो चुकी हैं। भोपाल सेंट्रल जेल से सिमी आतंकियों की फरार होने की घटना इसके बाद हुई है।

जिला जेलों में भी लगाएंगे इलेक्ट्रिक फेंसिंग

सेंट्रल जेलों में जिस तरह सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, उसी तरह जिला जेलों में भी जल्द ही वैसे ही प्रबंध किए जाएंगे। इलेक्ट्रिक फेंसिंग व सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। घटना में लापरवाही बरतने वाले जेलकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस फरार बंदियों की तलाश कर रही है।

- संजय चौधरी, महानिदेशक, मप्र जेल

Posted By: Hemant Upadhyay