भोपाल/सीहोर। इंदौर-भोपाल हाईवे पर ग्राम जताखेड़ा के पास हुए हादसे के दूसरे दिन मंगलवार को भी लापता तनिष्का की तलाश जारी रही। इस दौरान टकटकी लगाए परिजन आंसू पोंछते रहे। वे बार-बार टीम से पूछते रहे थे कि कोई जानकारी मिली क्या? स्थानीय होमगार्ड के तैराकों के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के दल ने नाले में बही भोपाल निवासी महिला तनिष्का तलरेजा पिल्लई को बहुत तलाशा पर वह नहीं मिली। अंधेरा घिरने के बाद सर्चिंग बंद कर दी गई। बुधवार सुबह फिर सर्चिंग अभियान चलेगा।

बता दें कि सोमवार की सुबह भोपाल के जीवन मोटर्स नेक्सा के कर्मचारी नसीम खान, संयोग प्रताप सिंह जादौन, तनिष्का तलरेजा पिल्लई, अजय आचार्य और फरहान खान कार से इंदौर कंपनी के प्रशिक्षण में शामिल होने जा रहे थे। तभी उनकी कार भोपाल-इंदौर हाईवे पर ग्राम जताखेड़ा के पास अनियंत्रित होकर पुलिया से टकराने के बाद नाले में गिर गई थी। इस हादसे में कार में सवार तनिष्का पिल्लई सहित अजय आचार्य, फरहान खान पानी के तेज बहाव में बह गए। वहीं नसीम खान और संयोग प्रताप सिंह कार में फंसे रहे। सुबह वहां से गुजरने वाले ग्रामीणों को नाले में कार दिखी, जिसकी सूचना पुलिस को दी।

इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेन से कार को बाहर निकाला था। नाले के पानी का बहाव इतना तेज था कि कार सवार अजय आचार्य और फरहान खान का शव करीब एक कि मी दूर मिला था, वहीं तनिष्का की तलाश करने के लिए होमगार्ड के तैराकों के अलावा एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी।

अंधेरा होने तक डटे रहे

मंगलवार की सुबह तनिष्का की तलाश में तैराक नाले में उतरे तो एसडीआरएफ की टीम के जवानों ने सर्चिंग जारी रखी। मौके पर डटे परिजनों की हालत बेहद खराब हो रही थी। वे बार-बार टीम के सदस्यों से पूछते कि कोई जानकारी मिली क्या? अंधेरे के कारण रात को जब काम रुका तो तनिष्का के पति राहुल बेहद परेशान हो गए । उनकी आंखें भर आई थी। टीम की मजबूरी थी नहीं तो वह रात में तनिष्का की तलाश करती। वहीं परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अब बुधवार को एक बार फिर तनिष्का की तलाश प्रारंभ की जाएगी।

संयोग का हुआ अंतिम संस्कार

संयोग सिंह जादौन का शव सोमवार को शाम को उसके पिता और भाई लेकर पहुंचे थे। मोहल्ले में शव पहुंचने के बाद मातम पसर गया था। लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसका बचपन जहांगीराबाद के वसुंधरा बैंक कॉलोनी में ही गुजरा था। उसकी इकलौती बहन के चंडीगढ़ से आने के लिए पूरी रात शव को घर में ही रखा गया। मंगलवार सुबह 11 बजे सुभाष नगर विश्रामघाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं अजय आचार्य का शव उसके परिजन राजगढ़ ले गए थे। फरहान के परिजन उसका शव देखकर रोकर बेहाल हो गए। फरहान ने हैदराबाद से नामी गिरामी कंपनी की नौकरी छोड़कर डेढ़ माह पहले ही भोपाल में कंपनी में शुरू किया गया था। इधर, ड्राइवर नसीम का शव जब उसके घर पहुंचा तो पत्नी का रो- रोकर बुरा हाल हो गया। वह उस पल को याद कर रही थी, जब उन्होंने अपने पति को टिफिन बनाकर दिया था। दोनों के शवों का उनकी धार्मिक आस्था के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।

बेटी को मां का इंतजार

इधर, तनिष्का की ढाई साल मासूम बेटी अपनी मां को याद कर रही है। वह बार- बार मां के बारे में पूछ रही है। उसके मामा और परिजन उसको संभाल रहे हैं लेकिन मासूम के सवालों को जबाव किसी के पास नहीं है। वह उसको बहला कर शांत कर रहे हैं।