गुरुजी : सरकारी स्कूल के दो शिक्षक शर्माजी और तिवारीजी कोविड आपदा केंद्र पर एक विषय को लेकर गंभीर चिंतन में थे। दरअसल, शर्माजी ने गर्मी की छुट्टी को लेकर कई बड़े सपने संजो लिए थे, जिस पर पूरी तरह से पानी फिर चुका है। शर्माजी बोल रहे थे, सोचा था कि इस साल डेढ़ माह की छुट्टी में गांव जाकर रहेंगे। वहां कोरोना से भी राहत रहेगी और गर्मी से भी। अब तो कोविड आपदा सेंटर में ड्यूटी ही लग गई है। अब इस साल की छुट्टी तो गई। इस पर तिवारीजी ने समझाते हुए कहा, कोई बात नहीं अगली गर्मी में ख्वाहिश पूरी कर लेना। इतना सुनते ही शर्मा जी का चेहरा लाल हो गया। बोले- दो तीन साल से तो गर्मी की छुट्टी के नाम पर खानापूर्ति ही हो रही है। जब ऐसा ही है तो देने की क्या जरूरत। इससे तो अच्छा होता कि छुट्टी ही नहीं देते।

प्राचार्यों की हो गई फजीहत

उत्कृष्ट कॉलज के डायरेक्टर पद की दौड़ में पीजी कॉलेज के तीन प्राचार्य शामिल थे। इनमें से किसी की भी दाल नहीं गली। इसमें भेल कॉलेज के प्राचार्य, स्टेट लॉ कॉलेज की प्राचार्य और छिंदवाड़ा कॉलेज के प्राचार्य शामिल थे, लेकिन चयन प्रक्रिया में तीनों को डायरेक्टर पद के लिए अयोग्य करार दिया गया। इस प्रक्रिया के बाद तीनों प्राचार्यों की काफी फजीहत भी हुई। इसके बाद सभी प्राचार्य अपनी इज्जत बचाने के लिए कॉलेज में जा बैठे हैं। हालांकि, स्टेट लॉ कॉलेज की प्राचार्य अब नए प्रयास में लग गई हैं। उनका मन कॉलेज में रम नहीं रहा है, इस कारण वह आजकल प्रमुख सचिव व शासन से अतिरिक्त संचालक बनने की फिराक में संपर्क साध रही हैं। इसके लिए उन्होंने प्रयास भी तेज कर दिए हैं। अब देखना यह है कि शासन उन्हें इस पद के योग्य समझता है या फिर अयोग्य ठहरा देता है।

वक्त के बहाव में न बह जाएं मंत्रीजी

हाल ही में सीबीएसई ने दसवीं बोर्ड की परीक्षा को निरस्त कर जनरल प्रमोशन देने की घोषणा की है, लेकिन प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री इससे आहत नजर आ रहे हैं। वजह, वह यहां बोर्ड के विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन देने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश के लिए वे कभी भी इस तरह का निर्णय नहीं लेंगे। हालांकि, पिछले साल इन्हीं मंत्रीजी ने दसवीं के दो विषयों में जनरल प्रमोशन दिया थे। इस बार बातों ही बातों में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के स्व. अर्जुन सिंह के शासनकाल की याद भी दिला दी। बोले- उनके शासनकाल में बच्चों को जनरल प्रमोशन मिला था, जिससे किसी को दूसरे राज्यों में एडमिशन नहीं मिल पाया। अब देखना यह है कि मंत्रीजी अपने विचारों पर अडिग रहते हैं या वक्त के बहाव में बह जाते हैं, क्योंकि पिछले साल पूरे नहीं पर थोड़े से तो बह ही गए थे।

अमृत के खाली लोटे का भ्रम

समुद्र मंथन का समय था। कई चीजें निकल रही थीं। बेचारे मास्साब भी बगल में टकटकी लगाए बैठे थे कि मंथन से अमृत का लोटा निकलेगा तो कुछ न कुछ उन्हें भी मिलेगा। जब अमृत निकला तो विभाग के अधिकारियों ने सारा अमृत पीकर खाली लोटा बगल में बैठे मास्साब को थमा दिया। लोगों ने मास्साब के हाथों में अमृत का लोटा देखा तो उन्हें लगा कि सारा अमृत यही पी गए। तभी तो मास्साब को अमर मानकर उनकी ड्यूटी हर जगह लगा दी जाती है। इधर, बेचारे मास्साब ने अभी तक किसी को यह भी नहीं बताया कि अमृत का लोटा तो पहले से ही खाली था। अमृत तो किसी और ने पी लिया। इस बार भी बेचारे मास्साब की ड्यूटी कोरोना सर्वे, टीकाकरण व आपदा सेंटर में लगा दी गई है, जबकि प्रदेश में करीब पांच हजार शिक्षक कोरोना संक्रमित हैं। इसके बावजूद उन्हें कोरोना योद्धा घोषित नहीं किया है।

Posted By: Ravindra Soni

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