भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। आज माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इस तिथि को षटतिला एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्‍यता है कि इस एकादशी के दिन व्रती को छह प्रकार से तिल का प्रयोग करते हुए भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है। पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और तिल का भोग लगाया जाता है। एकादशी के दिन जितने तिल का दान करते हैं, उतने ही पापों से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार षटतिला एकादशी का उपवास रखकर तिलों से ही स्नान, दान, तर्पण और पूजा की जाती है। इस दिन तिल का इस्तेमाल स्नान, प्रसाद, भोजन, दान, तर्पण आदि सभी चीजों में किया जाता है।

षटतिला एकादशी व्रत का महत्व

पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी का यह व्रत सच्‍चे मन से करने पर सभी इच्छाएं पूरी होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति इस एकादशी का व्रत नहीं भी करता है और केवल व्रत कथा सुनता है, तो भी उसे वाजपेय यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं इस एकादशी का व्रत करने वाले उपासक को दरिद्रता और कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस एकादशी व्रत के पुण्य फल से व्यक्ति को तीन तरह के पाप से मुक्ति मिलती है। पहला वाचिक, दूसरा मानसिक और तीसरा शारीरिक। मान्यता है कि व्यक्ति को जितना पुण्य कन्यादान, हजारों सालों की तपस्या और यज्ञों के करने से मिलता है, उसके बराबर पुण्‍य फल केवल इस षटतिला एकादशी के व्रत को विधि-विधानपूर्वक करने से मिलता है।

Posted By: Ravindra Soni

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