भोपाल (ब्यूरो)। कमजोर मानसून को लेकर सरकार चिंता में पड़ गई है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार की देर शाम विधानसभा परिसर में कृषि विभाग सहित मौसम वैज्ञनिकों को तलब कर लिया। उन्होंने अफसरों को हिदायत देते हुए कहा कि देर से होने वाली बोवनी के लिए बीज तैयार रखें।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अंटोनी डिसा एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाकर प्रदेश में अल्प वर्षा और उससे होने वाली परेशानियों की जानकारी ली। इस पर मौसम विभाग के केंद्र संचालक डॉ. अनुपम काश्यपी ने बताया कि देश में मध्य भारत में अवर्षा की स्थिति बनी है, जिसमें पश्चिमी मध्यप्रदेश की स्थिति सबसे खराब है। उन्होंने बताया कि केवल दो जिले रीवा और सीधी में सामान्य वर्षा हुई, जबकि 18 जिले में अभी भी वर्षा नहीं हुई है।

उत्तर पश्चिमी मध्यप्रदेश में मानसून धीरे-धीरे जम रहा है और जल्द ही एक-दो दिन में पूरे प्रदेश में जम जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री द्वारा डॉप्लर राडार की स्थिति पूछे जाने पर डॉ. काश्यपी ने बताया राडार से मानसून आने और उसकी तीव्रता की जानकारी दो-तीन घंटे पहले बताई जा सकती है ताकि लोग सजग हो जाए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मानसून आने की स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों से संपर्क बनाए रखें। मैदानी अमले को भी सतर्क कर दें। बीज की तैयारी रखें। किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि मानसून में विलंब के बाद एक-एक दिन बहुत कीमती है।

अल्प वर्षा के संकट की बनाई रणनीति

- मूंग, सोयाबीन, अरहर, उड़द, मक्का, धान, तिल, कोदो, कुटकी और बाजरा के जल्दी पकने वाले बीज की व्यवस्था की गई है।

- जल्द से जल्द मनरेगा में कृषि संबंधी ज्यादा से ज्यादा कार्य करवाकर मेहनताने का भुगतान कराए।

- प्रत्येक जिले को आवश्यक धनराशि दी जा रही है, जिससे वे प्राथमिक सहकारी समितियों को तत्काल बीज उपलब्ध करा सकें।

- खरीफ 2013 की फसल बीमा राशि का वितरण किया जा रहा है। खरीफ 2014 में किसानों को सहकारी बैंकों के माध्यम से 5,500 करोड़ रुपयों से ज्यादा का फसल ऋ ण दिया जा चुका है।

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