Shivraj Cabinet : भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार के सात दिन बाद भी विभाग बंटवारे की गुत्थी नहीं सुलझ सकी। बड़े विभागों को लेकर खींचतान अभी भी चल रही है। कोई भी पक्ष अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।

यही वजह है कि मंत्रियों को विभागीय जिम्मेदारी देने पर मंथन का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा में कहा था कि कल (गुरुवार) को कैबिनेट है, सब हो जाएगा, लेकिन सुबह ही बैठक स्थगित कर दी गई।

उधर, कुछ मंत्री भी क्षेत्र के दौरे पर निकल गए। सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों के बीच विभाग बांटने को लेकर एकराय कायम नहीं हो पा रही है। केंद्रीय और प्रदेश संगठन स्तर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चर्चा कर चुके हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भी दिल्ली दौरे के दौरान चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक स्थिति साफ नहीं हुई है। यही वजह है कि लगातार विभागों का बंटवारा एक-एक दिन कर टलता जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को जब प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा में यह कहा था कि गुरुवार को कैबिनेट बैठक होने वाली है और सब हो जाएगा।

इसके बाद कैबिनेट बैठक का समय सुबह साढ़े दस से बढ़ाकर शाम पांच बजे किया गया, तब यह संभावना जताई गई थी कि वे बैठक के पहले विभागों का बंटवारा कर देंगे। मंत्री भी इसी उम्मीद थे। गुरुवार को सुबह उत्तर प्रदेश का दुर्दांत अपराधी विकास दुबे उज्जैन महाकाल मंदिर परिसर से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अचानक कैबिनेट की बैठक स्थगित कर सभी मंत्रियों को सूचना भेजी गई।

लगातार विभाग बंटवारा टलता देख कुछ मंत्री क्षेत्र के दौरे पर निकल गए। वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव सुरखी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चले गए। गोविंद सिंह राजपूत, डॉ.प्रभुराम चौधरी पहले से क्षेत्र के दौरे पर हैं। बड़े विभागों पर नहीं बन रही बात सूत्रों का कहना है कि सिंधिया समर्थक मंत्री बड़े विभाग (परिवहन, राजस्व, वाणिज्यिक कर, जल संसाधन, नगरीय विकास, महिला एवं बाल विकास सहित अन्य) चाहते हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के माध्यम से वे यह बात केंद्रीय संगठन तक पहुंचा चुके हैं। जबकि मुख्यमंत्री विभागों को लेकर नए और वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बड़े विभागों को लेकर समन्वय बनाना चाहते हैं। इसको लेकर वे कुछ मंत्रियों से भी चर्चा कर चुके हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ भी उन्होंने विभागों के बंटवारे को लेकर लंबी चर्चा की थी।

बताया जा रहा है कि अब पूरा मामला केंद्रीय संगठन के ऊपर छोड़ दिया गया है। वहीं से समन्वय बनाकर मुख्यमंत्री विभाग बंटवारे की सूची को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

बजट छापने के लिए चाहिए कैबिनेट की अनुमति

उधर, कैबिनेट की बैठक अब कब होगी, यह अभी तय नहीं है। जबकि 20 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होना है और बजट पुस्तिका छपने के लिए सरकारी प्रेस को भेजी जानी है।

इसके लिए वित्त विभाग को कैबिनेट की अनुमति चाहिए। जब तक विभागों का बंटवारा नहीं हो जाता, तब तक मुख्यमंत्री ही विभाग के भारसाधक मंत्री हैं। उनके अनुमोदन से बजट मसौदे को अंतिम रूप देकर कैबिनेट में रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री भी यह बात कह चुके हैं कि सभी विभाग मुख्यमंत्री में निहित होते हैं और वे सभी विभागों के मंत्री हैं। वहीं, वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभागवार बजट पुस्तिका तैयार करने के लिए कम से कम पांच-छह दिन का समय चाहिए।

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