Shivraj Cabinet : भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। दिल्ली से लेकर भोपाल तक कई दौर की बैठकों के बाद भी विभागों के बंटवारे पर माथापच्ची जारी है। मंत्रिमंडल विस्तार के छठवें दिन भी विभागों को लेकर असमंजस बरकरार रहा। उधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में विभागों के आवंटन पर मीडिया से कहा, "सारे विभाग मुख्यमंत्री में निहित होते हैं। मैं सारे विभागों का मंत्री हूं और सब काम सुचारू चल रहे हैं। कल (गुरुवार) को कैबिनेट है। सब हो जाएगा।" इधर, कांग्रेस ने सरकार की इस स्थिति को लेकर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कभी इतने कमजोर नहीं दिखे कि विभाग का बंटवारा तक न कर पाएं।

मुख्यमंत्री के बयान के मायने यह निकाले जा रहे हैं कि अब भी विभागों के बंटवारे की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है। जबकि मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ बैठक के बाद संकेत दिए गए थे कि बुधवार को विभागों का आवंटन हो जाएगा।

गुरुवार को हुआ था विस्तार

छह दिन पहले (गत गुरुवार) मंत्रिमंडल का विस्तार होने के बाद संभावना जताई जा रही थी कि दो-तीन दिन में मंत्रियों को विभाग बांट दिए जाएंगे और विधिवत कामकाज प्रारंभ हो जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार और सोमवार को विभागों के बंटवारे को लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, पार्टी उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकातें की थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी इस दौरान उनकी चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि सिंधिया समर्थक मंत्रियों के लिए बड़े विभागों की मांग रखी गई है। उपचुनाव की परिस्थिति को देखते हुए केंद्र से लेकर प्रदेश भाजपा संगठन के स्तर पर मंथन का दौर चला, लेकिन आमराय नहीं बन पा रही है।

बड़े विभागों पर दावा छोड़ने को तैयार नहीं सिंधिया समर्थक

माना जा रहा है कि सिंधिया समर्थक बड़े विभागों पर दावा छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं, मुख्यमंत्री भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों को कुछ महत्वपूर्ण विभाग उनके अनुभव के आधार पर देना चाहते हैं। इसी मुद्दे पर पेंच फंसा हुआ है।

अंतिम निर्णय के लिए हाइकमान से बात

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने कुछ मंत्रियों से विभागों को लेकर चर्चा भी की है, जिसमें उन्होंने अपनी प्राथमिकता बता दी है। माना जा रहा है कि प्रदेश संगठन से चर्चा के बाद अब अंतिम निर्णय लेने के लिए एक बार फिर केंद्रीय संगठन से संवाद किया जा रहा है। यही वजह है कि बुधवार को भी देर शाम तक विभागों के बंटवारे पर असमंजस की स्थिति बनी रही।

कैबिनेट बैठक का समय बदला

विभागों के बंटवारे की कवायद के बीच सरकार ने कैबिनेट बैठक का समय फिर बदल दिया है। मंत्रियों को जो सूचना भेजी गई थी, उसके मुताबिक बैठक गुरुवार सुबह साढ़े दस बजे से होनी थी, लेकिन इसे अब बढ़ाकर शाम पांच बजे कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इसके पहले मुख्यमंत्री विभागों का बंटवारा कर सकते हैं।

प्रदेश की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा : पीसी शर्मा

पूर्व जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री को कभी इतनी कमजोर स्थिति में नहीं देखा। मंत्रिमंडल विस्तार के छह दिन बाद भी विभाग नहीं बांट पाने से उनकी स्थिति को अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे जनता का नुकसान हो रहा है और प्रदेश की छवि पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

सबसे सलाह करके निर्णय लेती है पार्टी : डॉ.मिश्रा

प्रदेश के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने विभागों का बंटवारा न हो पाने को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री आपको (मीडिया) सब बता चुके हैं। जल्द ही विभागों का बंटवारा हो जाएगा। भाजपा की कार्य पद्धति सबसे सलाह-मशविरा करने की है। इसके आधार पर यह पार्टी चलती है। यह कोई परिवार नहीं है। पार्टी कोई व्यक्ति नहीं, एक समूह है जो परस्पर चर्चा के बाद आगे बढ़ता है।

महत्वाकांक्षा तो सबकी होती है : भार्गव

विभागों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान के बीच वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि यह कोई साधु-महात्मा की जमात तो है नहीं, राजनीतिक लोग हैं और सबकी महत्वाकांक्षा होती है। सिंधिया समर्थक मंत्रियों के दबाव बनाने को लेकर कहा कि सभी चाहते हैं कि अच्छा विभाग मिले। हर व्यक्ति की अपनी अलग पहचान और हैसियत होती है। विभाग देने का विशेषाधिकार मुख्यमंत्री का होता है। जल्द ही विभागों का बंटवार हो जाएगा।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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