Shivraj Cabinet : धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार भले ही भाजपा की हो, लेकिन पार्टी इन दिनों संक्रमण काल से गुजर रही है। 2018 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद से पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन के स्वर गूंज रहे हैं। कहीं उम्र सीमा तो कहीं नए चेहरे लाकर संगठन में यह परिवर्तन कुछ स्तरों पर हुआ, लेकिन अब यह शिवराज कैबिनेट के विस्तार में आड़े आ रहा है। नए चेहरों को लेकर अनिर्णय की स्थिति है।

नए और युवा चेहरे विष्णुदत्त शर्मा को पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष तो बना दिया, लेकिन यह पहला अवसर है, जब मंत्रियों के चयन पर नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। खुद को सबसे अनुशासित पार्टी बताने वाली भाजपा दो माह में भी शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार की कवायद को परिणाम में नहीं बदल सकी। पार्टी नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृृत्व का सुर सरकार में भी पीढ़ी परिवर्तन पर एक है। यही कारण है कि शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार पर एक बार फिर मंगलवार को टाल दिया गया।

शिवराज फिर जाएंगे दिल्ली

पार्टी नेताओं की मानें तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर अपनी बात मनवाने के लिए दिल्ली का रुख कर सकते हैं पर देर शाम शिवराज ने कहा कि कल यानी बुधवार की जगह गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है।

शाह ने की थी बदलाव की शुरुआत

दरअसल, पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन की शुरुआत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह ने की थी, जिसे राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष आगे बढ़ा रहे हैं। शाह ने 2018 के चुनाव में ही एक सीमा रेखा खींच दी थी, जिसमें मप्र के वयोवृृद्ध बाबूलाल गौर, सरताज सिंह, कुसुम महदेले, रामकृृष्ण कुसमरिया जैसे नेताओं के टिकट कट गए थे। इसके बाद भाजपा के संगठन चुनाव हुए तो सबसे पहले मंडल अध्यक्ष के लिए 35 साल की उम्र सीमा तय की गई। इसके बाद जिलाध्यक्षों के लिए भी 50 साल की लक्ष्मण रेखा खींच दी। कुछ अपवाद जरूर रहे, लेकिन बाकी सभी पदों के लिए नए चेहरों को भाजपा ने मौका दिया।

बारी शिवराज के मंत्री चुनने की

अब बारी प्रदेश संगठन के पदाधिकारी और शिवराज सरकार में मंत्रियों को चुनने की है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में चली कवायद के बाद भी मंत्री पद के दावेदारों के नाम फाइनल नहीं हो पाए। साफ है कि सरकार में वर्षों से जमे लोग अपना स्थान नहीं छोड़ना चाह रहे। इधर, पार्टी में सक्रिय मौजूदा पीढ़ी पर नजर दौड़ाएं तो सारे नेता 1985 से 1990 के आसपास में पार्टी में आए थे।

शिवराज सिंह चौहान, गोपाल भार्गव, कैलाश विजयवर्गीय, अजय विश्नोई, गौरीशंकर बिसेन, चौधरी चंद्रभान सिंह, कुसुम महदेले, विजय शाह, डॉ. गौरीशंकर शेजवार, नरोत्तम मिश्रा और लक्ष्मीकांत शर्मा जैसे कद्दावर नाम इनमें शामिल हैं। उस दौरान जिस पीढ़ी को तत्कालीन नेता सुंदरलाल पटवा पार्टी में लेकर आए थे, उनमें अब इनमें से कुछ चुनाव हार गए, कुछ बाहर हो गए तो कुछ अभी भी जमे हुए हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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