Silk Scam in Madhya Pradesh: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। नर्मदापुरम जिले में करीब 15 साल से रेशम उत्पादन में कर्मचारी और अध‍िकारियों द्वारा गड़बड़ी की शिकायतें किसानों द्वारा मंत्री, लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ और रेशम आयुक्त से की गईं। शिकायतों के बाद खानापूर्ति के लिए जांचें भी चलती रहीं, लेकिन आंच किसी पर नहीं आई।

कार्रवाई के नाम पर पिछले हफ्ते तृतीय श्रेणी के दो कर्मचारियों को आयुक्त रेशम मनु श्रीवास्तव ने निलंबित किया है, लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों पर कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अधीन आने वाले इस विभाग के कई मंत्री, प्रमुख सचिव और आयुक्त रेशम बदले, लेकिन किसी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसी कारण भ्रष्टाचारियों का दुस्साहस बढ़ता गया।

सबसे बड़ा घोटाला 2015 में सामने आया था। शुरुआत में इसमें करीब 200 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बात सामने आई थी। इसमें 29 अधिकारी-कर्मचारियों का नाम आया था। इनमें उप संचालक, सहायक संचालक, क्षेत्र अधिकारी और अन्य कर्मचारी-अधिकारी शामिल थे। गड़बड़ी करने के आरोपी अधिकारी-कर्मचारी एक-एक कर सेवानिवृत होते जा रहे हैं, लेकिन विभागीय जांच सात साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है।

इससे साफ है कि विभाग के आला अधिकारी ही मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। 2005-06 से शुरू हुई इस गड़बड़ी की शिकायत 2015 में लोकायुक्त में भी हुई थी, लेकिन अभी भी जांच पूरी नहीं हुई है। इसकी वजह यह भी है कि रेशम संचालनालय की तरफ से लोकायुक्त पुलिस को जरूरी जानकारी बार-बार मांगने पर भी नहीं दी जा रही है।

जांच में देरी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने की वजह यह है कि गड़बड़ी करने वालों को रेशम संचालनालय में बैठे कुछ अधिकारी संरक्षण दे रहे हैं। यही कारण है कि किसानों द्वारा कई मंत्री प्रमुख सचिव, आयुक्त रेशम को अलग-अलग मामलों में एक बाद एक कई शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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