भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। पुराना शहर किसी भी कस्बे, राजधानी, नगर की आत्मा होता है। यह उस शहर की उम्र बताता है और इतिहास को दर्शाता है। यही कारण है कि भोपाल के पुराने शहर में बने छह ऐतिहासिक दरवाजे इंफ्रेंट्री गेट, इस्लामी गेट, लाल दरवाजा, नूर महल दरवाजा, बाग फरहत, अफगान गेट को संवारने के लिए 2014 से कवायद चल रही है, लेकिन यह काम आज तक पूरा नहीं हो पाया है। इस्लामी गेट पर स्थानीय अवैध कब्जेधारियों के विरोध के चलते काम शुरू ही नहीं हो पाया। लाल दरवाजा, नूर महल दरवाजा और बाग फरहत अफगान गेट भी अतिक्रमण की चपेट में है। वर्ष 2014 से अब तक चार कलेक्टर व दर्जनों अफसर बदल गए, इसके बावजूद इन दरवाजों को अपने मूल स्वरूप में लाने का काम पूरा नहीं हो पाया है। कुछ दरवाजों के लिए जरूर काम शुरू हुआ था, लेकिन अतिक्रमण न हटने के कारण काम पूरा नहीं हो पाया है। यह तब है, जबकि 105 करोड़ स्र्पए से जीर्णोद्धार के लिए डीपीआर बना ली गई थी।

सरकार चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले, बैठके कर निर्देश दे दे लेकिन अधिकारी समय पर इस काम को अंजाम देने में असमर्थ दिखाई दे रहे है। राजधानी के इन 6 ऐतिहासिक दरवाजों की मरम्मत कर उन्हे मूल स्वरूप में लाने के लिए पूर्व मुख्य सचिव एंटोनी जेसी डिसा की अध्यक्षता में 20 अगस्त 2014 को समन्वय समिति की बैठक हुई थी। इसमें सरकार की ओर से 38 लाख 32 हजार 240 रुपए इन दरवाजों की मरम्मत के लिए मंजूर किए गए थे। बाद में डिसा ने यहां का दौरा कर जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए। इतना सब होने के बाद भी अफसरों ने अतिक्रमणकारियों को नोटिस तक नहीं दिए। हैरत की बात तो यह है कि आज तक एक भी दरवाजे का काम पूरा नहीं हो पाया। विभाग अतिक्रमण हटाने के लिए बीते दो साल से कलेक्टर और नगर निगम को पत्र लिख रहा है। कार्रवाई तो दूर, कलेक्टर कार्यालय से खत का जवाब ही नहीं दिया गया।

यह है स्थिति

तीन मोहरे गेट (शाहजहांनाबाद) : मोतिया तालाब स्थित तीन मोहरे गेट का निर्माण 1871 से 1884 के बीच हुआ। इसे बेगम सुल्तानजहां ने बनाया था। एक गेट में कचरा पड़ा है। दो दरवाजों से ट्रैफिक गुजरता है। दुस्र्स्त किया गया, लेकिन अब भी अतिक्रमण की चपेट में है।

इस्लामी गेट : इसका निर्माण सुल्तान जहां बेगम ने कराया था। इसका इस्तेमाल नवाब परिवार इस्लाम नगर जाने के लिए करता था। इस गेट के पास गुमठियां व कुछ पक्के निर्माण हो गए हैं। गेट जर्जर हालत में है।

लाल दरवाजा (मॉडल ग्राउंड के पास) : यह दरवाजा लाल पत्थरों से बना है। पहले यह रास्ता हुआ करता था। अब यह सड़क के किनारे है। चारो ओर अतिक्रमण, नीचे ऑटो पार्ट की अवैध दुकानें हैं और ऊपरी हिस्से में लोग रह रहे है। दरवाजे के आसपास रेत, सीमेंट और मैकेनिकों की दुकानें और गुमठियां लग गई हैं।

शाहजहांनाबाद गेट : इस गेट का निर्माण शाहजहां बेगम ने कराया था। इसका उपयोग शाही मेहमानों को लाने के लिए होता है। इसके आसपास गुमठियां और ठेले लग गए हैं। दरवाजे का प्लास्टर भी झड़ गया है।

जुमेराती गेट : अतिक्रमण की चपेट में है, चारो ओर गल्ला मार्केट लगता है।

काला दरवाजा (ताजुल मसाजिद की एंट्री) : आसपास अतिक्रमण है। दुकानें लगी है। एक बार दुकानें हटाई भी जा चुकी हैं, लेकिन अतिक्रमणकारी फिर से काबिज हो गए।

दाखिल दरवाजा ( ताजमहल का एंट्री गेट) : इसके बाजू में कबाड़ी और अन्य टीन शेड बने हुए हैं, जिन्‍हें अब तक हटाया नहीं गया है जबकि ताजमहल का रेनोवेशन शुरू हो गया है।

पुरातत्व विभाग का यह है पक्ष

जब तक इन दरवाजों के अंदर और आसपास के अतिक्रमण और अवैध कब्जों को नहीं हटाया जाता, तब तक यहां मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम कर पाना मुश्किल है।

किसी भी शहर में पुराना शहर उसकी उम्र बताता है उसकी आत्मा होता है। ऐसे में अगर हम शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजकर नहीं रखेंगे तो फिर सब कुछ खत्म हो जाएगा। जिस भी एजेंसी की यह जिम्मेदारी है। उसे आपसी सामंजस्य बनाकर काम करना चाहिए। पुरानी धरोहरों को गिराना नहीं, बल्कि संवारकर रखना चाहिए।- पूजा सक्सेना, पुरातत्वविद्

हम ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की पूरी तैयारियां कर रहे है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कुछ दरवाजों के रेनोवेशन का काम भी हुआ है। शेष काम भी जल्द किया जाएगा। - अविनाश लवानिया, कलेक्टर, भोपाल

Posted By: Ravindra Soni

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