Single Use Plastic: भोपाल(राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में प्रशासन सिंगल यूज प्लास्टिक एवं पालीथिन कैरी बैग पर प्रतिबंध लगाकर भूल ही गया। प्रतिबंध के पौने तीन महीने बाद भी थोक बाजार से सब्जी बाजार तक धड़ल्ले से अमानक स्तर की प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है। यहां तक कि पालीथिन में उन मरीजों को भी गर्मागरम चाय और दही परोसा जा रहा है, जो इलाज कराने के लिए अस्पतालों में भर्ती हैं।

इन हालातों में भी स्थानीय प्रशासन मौन है। शुरूआत में अभियान चलाकर प्लास्टिक जब्त करने के बाद किसी ने मुड़कर भी नहीं देखा। ज्ञात हो कि भारत सरकार ने जुलाई-2022 से देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। मध्य प्रदेश सरकार मई-2017 में 75 माइक्रोन से अधिक मोटाई के पालीथिन कैरी बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगा चुकी है।

प्रदेश के अधिकांश शहरों में स्थानीय प्रशासन की शह पर प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि सभी को पता होने के बाद भी सब्जी बाजार, किराना दुकान, चाय की दुकानों पर पालीथिन में सामग्री दी जा रही है। नगरीय निकाय के जिम्मेदार अधिकारी रस्म अदायगी के लिए कभी-कभी बाजार में निकलते हैं और कुछ फुटकर व्यापारियों पर कार्रवाई कर पाते हैं, तब तक उस बाजार से प्लास्टिक गायब हो जाती है।

प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक लगाने की जिम्मेदारी नगरीय विकास एवं आवास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की है। इनके पास ठीक-ठीक यह जानकारी भी नहीं है कि प्लास्टिक आ कहां से रही है। क्योंकि प्रदेश में ऐसे 21 उद्योग जून 2022 में ही बंद किए जा चुके हैं।

गुजरात-महाराष्ट्र से आ रही प्लास्टिक

प्रदेश में प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे प्लास्टिक बनने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा गुजरात एवं महाराष्ट्र से भी प्लास्टिक लाई जा रही है। प्रतिबंध के चलते यहां आने वाली प्लास्टिक के दाम भी ज्यादा लिए जा रहे हैं।

इस सामग्री पर लगी रोक

सिंगल यूज प्लास्टिक से बने झंडे, प्लेट, कप, गिलास, कटलरी (कांटे, चम्मच, चाकू, ट्रे), मिठाई के बाक्स, निमंत्रण पत्र, सिगरेट के पैकेट पर लपेटे जाने वाली फिल्म, सौ माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक एवं पीवीसी बैनर, स्टिक, गुब्बारे, कैंडी और आइसक्रीम की स्टिक, सजावट के लिए थर्माकोल की सामग्री पर रोक है।

50 रुपये से पांच हजार रुपये तक जुर्माना

सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादन एवं उपयोग पर उत्पादनकर्ता, विक्रेता, उपयोगकर्ता एवं परिवहनकर्ता पर 50 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रविधान है। जिसे बढाया भी जा सकता है।

भोपाल में सिर्फ दो क्विंटल प्लास्टिक जब्त

भोपाल में पिछले दो माह में नगर निगम ने सिर्फ दो क्विंटल प्लास्टिक जब्त की है। 120 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए हैं और 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं राजधानी में प्रतिदिन 20 टन प्लास्टिक और पालीथिन कचरा निकलता है।

जबलपुर में 76 टन प्लास्टिक जब्त

जबलपुर शहर में प्रतिदिन 25 टन प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। जिसका निष्पादन कठौंदा स्थित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में किया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. आलोक जैन ने बताया कि पिछले महीनों में सिंगल यूज प्लास्टिक बनाने वाले पांच उद्योगों को बंद कराया है। गौर जमतरा में कारखाने को सील किया है। बालाजी ट्रांसपोर्ट के गोदाम पर दबिश देकर एक करोड़ 14 लाख रुपये मूल्य का 76 टन सिंगल यूज प्लास्टिक और अमानक पालीथिन जब्त की है। वहीं 264 के खिलाफ चालानी कार्रवाई करते हुए एक लाख 63 हजार 540 रुपये जुर्माना लगाया गया है।

सरकार लाचार, जागरुकता से ही आस

जब जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो उनका कहना था कि प्रतिबंध लगाने से नहीं जनता के जागरुक होने से ही प्लास्टिक पर रोक लगेगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह कहते हैं कि निकाय लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। प्लास्टिक जब्त की जा रही है और संबंधितों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। जनता में जागरुकता भी जरूरी है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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