भोपाल, नवदुनिया न्यूज।

स्मार्ट रोड की राह में बाधा बन रही खसरा नंबर 1413 की आहाता रुस्तम खां की जमीन पर हाईकोर्ट का स्टे हटवाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। दो दशक पहले तक सरकारी रिकार्ड में यह जमीन सरकारी थी, लेकिन सरकार की यह जमीन कैसे निजी भूमि हो गई, इसकी जांच शुरू कर दी गई है। हाईकोर्ट से स्टे हटवाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से 1935 से वर्ष 2017 तक के खसरा रिकार्ड में हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा।

शुक्रवार को दिनभर स्मार्ट सिटी सेल के अफसर कलेक्ट्रेट स्थित राजस्व शह वृत्त कार्यालय में खसरा नंबर 1413 का पुराना रिकार्ड खंगालते रहे। स्मार्ट सिटी सेल को वर्ष 1935 से 2000 और वर्ष 2012 से 2017 तक के खसरों की नकल मिल गई है। लेकिन वर्ष 2000 से 2012 तक के खसरों का रिकार्ड नहीं मिल पाया है। सूत्रों के मुताबिक इस बीच के कुछ खसरे गायब हैं। इस अवधि के कुछ खसरे पुराने हो जाने के कारण जिल्द कराने के लिए भेगे गए हैं, इसलिए शनिवार को इन्हें मंगाकर फिर से रिकार्ड खंगाला जाएगा।

हाईकोर्ट में 11 अप्रैल को होनी है सुनवाई

पार्षद सबिस्ता जकी की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका पर 11 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। जकी ने 2002 के खसरा रिकार्ड और इससे पूर्व की डिक्री के आधार पर अहाता रुस्तम खां की जमीन को निजी बताया है। जबकि इससे पुराने खसरा रिकार्ड में यह जमीन सरकारी दर्ज थी। जिला प्रशासन और स्मार्ट सिटी सेल अब पुराने खसरा रिकार्ड को आधार बनाकर ही इस जमीन को सरकारी साबित करने की कोशिश करेगा। इसके लिए तैयार की जा रही 80 साल की खसरा रिपोर्ट में हर साल के खसरा रिकार्ड में विवादित जमीन की स्थिति का उल्लेख किया गया है।

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