नगर निगम

- नगर निगम द्वारा बड़ी मूर्तियों के विजर्सन के लिए क्रेन की व्यवस्था की थी। गाड़ियों से उठाकर तालाब के 10 फीट किनारे पर ही विसर्जित की जाती है, इससे किसी तरह का खतरा नहीं होता। फिर भी नाव को अंदर जाने दिया गया।

- व्यवस्था बनाने के लिए अनाउंसमेंट की व्यवस्था निगम की ओर से की जानी थी, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं मिली।

- छोटे तालाब में खटलापुरा, तलैया कालीघाट, कमलापार्क स्थित धोबीघाट पर कुल तीन स्थानों पर विसर्जन प्वाइंट बनाए गए हैं। यहां करीब दो दर्जन नावें तैनात थी। आखिर नावों को किस आधार पर अनुमति दी गई। निगम प्रशासन का कहना है कि उन्होंने कोई अनुमति नहीं दी तो फिर इन्हें चलने क्यों दिया गया।

- नगर निगम व जिला प्रशासन ने तैयारियों के दौरान इन नावों को लेकर सुरक्षा संबंधी गाइड लाइन का ऑडिट नहीं किया।

- नाव में चढ़कर मूर्ति विसर्जन करने वाले लोगों के लिए लाइफ जैकेट की व्यवस्था नहीं की गई। यदि लोग जैकेट पहने होते तो इतनी बड़ी तादात में जान नहीं जाती। निगम की ओर से दो से तीन लाइफ जैकेट ही थी।

- छोटी नाव में जब 19 लोग सवार हुए तो उन्हें रोका क्यों नहीं गया। आखिर नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन क्या कर रहा था?

- इस प्वाइंट में तैनात सहायक फायर ऑफिसर साजिद खान का कहना है कि दो गोताखोर मौके पर तैनात थे, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब लोग डूब रहे थे तो उस दौरान गोताखोर बचाव करते हुए नजर नहीं आए।

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जिला प्रशासन

- प्रशासन ने जिस अधिकारी की ड्यूटी यहां लगाई थी वह मौके पर नहीं था।

- एनजीटी के निर्देशों के अनुसार छह फीट से बड़ी मूर्तियां शहर में नहीं बनने दिया जाना था, इसके बावजूद शहर में बड़ी-बड़ी मूर्तियां बनने दी गईं। इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया।