भोपाल, नई दिल्ली(ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में चल रही सियासत का अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर लंबी बहस चली, लेकिन फैसला नहीं हो पाया। अदालत ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि 16 बागी विधायकों के इस्तीफे पर वह फैसला कब लेंगे। इस पर सिंघवी ने कहा कि वह गुरुवार को बता पाएंगे। अदालत ने बागी विधायकों को न्यायाधीशों के समक्ष चैंबर में पेश किए जाने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि फ्लोर टेस्ट में शामिल हों या नहीं लेकिन विधायकों को बंधक नहीं बनाया जा सकता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ के समक्ष सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। कोर्ट ने स्पीकर के वकील सिंघवी से कहा कि अगर बागी विधायक गुरुवार को उनके समक्ष पेश हों तो क्या वह उनके इस्तीफे पर फैसला ले लेंगे। इस पर बागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि वे स्पीकर के समक्ष नहीं पेश होना चाहते।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने सिंघवी से कहा कि कोर्ट के पूर्व फैसले कहते हैं कि स्पीकर को जल्द फैसला करना चाहिए। बताइए स्पीकर कब तक फैसला कर लेंगे। सिंघवी ने कहा कि वे इस बारे में कोर्ट को गुरुवार को ही बता पाएंगे। जस्टिस चंद्रूचड़ ने कहा कि उनकी चिंता मात्र यह है कि हॉर्स ट्रेडिंग न हो। इस पर सिंघवी ने कहा कि 'हॉर्स इज ऑलरेडी अंडर कैप्टिविटी'। तभी मुख्यमंत्री कमल नाथ के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कमल नाथ उन लोगों से मिलना चाहते हैं। लेकिन बागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने मिलने से साफ इनकार कर दिया। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मुश्किल यह है कि यह मामला कोई बच्चे की कस्टडी का नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में दखल नहीं देना चाहता लेकिन यह सुनिश्चत होना चाहिए कि लोग अपनी मर्जी से निर्णय लें।

भाजपा विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी और 16 बागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने सभी बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के चैंबर में पेश करने का प्रस्ताव किया, लेकिन कोर्ट ने इससे इन्कार कर दिया। रोहतगी ने दूसरा प्रस्ताव रखा कि तो फिर विधायकों को रजिस्ट्रार जनरल या किसी और से मिलने को कहा जाए। कोर्ट इस पर भी राजी नहीं हुआ।

सभी पक्षों ने रखे अपने-अपने तर्क

स्पीकर

स्पीकर की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यपाल स्पीकर को यह नहीं बता सकते कि कैसे सदन चलाया जाए। सदन कैसे चलेगा यह तय करने का अधिकार सिर्फ स्पीकर को होता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने उनसे कहा कि आप विधायकों के इस्तीफे पर कोई निर्णय क्यों नहीं लेते। आपने 16 मार्च को बजट सत्र को टाल दिया। ऐसे कैसे राज्य चलेगा जबकि बजट ही पास नहीं होगा। उस दिन विधानसभा बुलाई गई और फिर स्थगित कर दी गई। सिंघवी ने कहा कि छह विधानसभाएं कोरोना की वजह से स्थगित हुई हैं।

कांग्रेस

कांग्रेस के वकील दुष्यंत दवे ने भाजपा की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चुनाव में मध्य प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताया था। कांग्रेस को चुनाव में 114 सीटें मिली थीं जबकि भाजपा को 109 सीटें मिली थीं। कांग्रेस की सरकार पूर्ण बहुमत से बनी थी। दवे ने कहा कि मामले में सुनवाई की कोई जल्दी नहीं है। देश और दुनिया में इतनी बड़ी महामारी फैली है। पहले स्पीकर को यह तय करने देना चाहिए कि विधायकों के इस्तीफे वास्तविक हैं या नहीं हैं। कांग्रेस के 16 विधायक बंधक बना कर रखे गए हैं। जब तक वे नहीं छोड़े जाते, तब तक शक्ति परीक्षण कैसे हो सकता है। यह मामला शक्ति परीक्षण का नहीं बल्कि धन और बाहुबल का है।

भाजपा

भाजपा विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। स्पीकर ने सिर्फ छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया। बाकी 16 विधायकों के इस्तीफे पर फैसला नहीं लिया है, जबकि सभी इस्तीफों की भाषा एक जैसी है। रोहतगी ने कहा कि कोई भी विधायक बंधक नहीं है। सब अपनी मर्जी से गए हैं। विधायकों ने टीवी पर यह बात कही भी है। कांग्रेस चाहती है कि विधायक भोपाल आएं ताकि उन्हें प्रभावित किया जा सके। रोहतगी ने कांग्रेस को आधी रात में और छुट्टी के दिन सुनवाई की याचिकाएं लेकर कोर्ट पहुंचने के मामलों की याद दिलाई। रोहतगी ने कहा कि अगर कोई मुख्यमंत्री बहुमत साबित करने से बचता है तो इसका साफ मतलब है कि वह बहुमत खो चुका है। रोहतगी ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि राज्य में ठीक सरकार चले। राज्यपाल ने अपनी इसी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था, जिसका पालन नहीं हुआ।

Posted By: Prashant Pandey

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