भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से मध्यप्रदेश को भी अपूरणीय क्षति हुई। स्वराज ने मध्यप्रदेश को 11 साल से अधिक समय दिया। सुषमा मप्र के विदिशा लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद निर्वाचित हुईं। इससे पहले वे प्रदेश के कोटे से राज्यसभा में सदस्य भी रहीं।

2008 में सुषमा स्वराज ने भोपाल को अपना स्थाई ठिकाना बना लिया था और प्रोफेसर कॉलोनी स्थित सरकारी बंगले में रहने लगी थीं। भोपाल का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी सुषमा स्वराज की ही देन है। 2004 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने भोपाल में एम्स की आधारशिला रखी थी।

उनका लोकसभा क्षेत्र विदिशा हो या मप्र का कोई भी कार्यकर्ता अथवा महिलाएं, सभी उन्हें दीदी कहकर पुकारा करते थे। 2009 में विदिशा लोकसभा क्षेत्र से रिकार्ड मतों से जीतने के बाद सुषमा लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता बनीं। लोकसभा में अत्यधिक व्यस्तता के बाद भी सुषमा अपने विदिशा लोकसभा क्षेत्र को हर महीने पांच दिन दिया करती थीं।

विदिशा के विकास को लेकर वह हर महीने समीक्षा बैठक करती थीं। इसमें न सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ता, बल्कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों से भी वे बात किया करती थीं। रक्षाबंधन का पर्व हमेशा सुषमा स्वराज ने विदिशा में ही मनाया। अपने सारे कार्यकर्ताओं को रक्षाबंधन पर राखियां बांधा करती थीं।

याददाश्त का कोई सानी नहीं

याददाश्त के मामले में भी सुषमा स्वराज का कोई सानी नहीं। पहले ही चुनाव में जब वे विदिशा चुनाव लड़ने पहुंचीं तो बहुत कम समय में उन्हें एक-एक बूथ और एक-एक बूथ के कार्यकर्ता मंडल के अध्यक्ष पदाधिकारी से लेकर सारे कार्यकर्ताओं का नाम तक याद हो गया था। जब भी कोई सामने आता तो वह उसका नाम लेकर पुकारा करती थीं।

शिवराज के आग्रह पर आईं मप्र

पार्टी के नेता बताते हैं कि सुषमा स्वराज को जब यह लगा कि वे दिल्ली लोकसभा से चुनाव नहीं जीत पाएंगी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आग्रह पर वे मप्र आईं। चौहान ने पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से आग्रह किया था कि सुषमा स्वराज को मप्र भेज दें। स्वराज को पहले भोपाल से चुनाव लड़वाए जाने का इरादा था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के भोपाल से चुनाव लड़ने की वजह से सुषमा स्वराज को विदिशा से टिकट दी गई। 2009 के चुनाव में सुषमा स्वराज विदिशा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी थीं, तब विपक्षी दल कांग्रेस के प्रत्याशी राजकुमार पटेल का नामांकन रद्द कर दिया गया था। इस दौरान उन्होंने रिकार्ड मतों से विदिशा लोकसभा सीट जीता। अगले चुनाव में उनके खिलाफ दिग्विजय सिंह के अनुज लक्ष्मण सिंह ने चुनाव लड़ा।

कमलनाथ, शिवराज, कैलाश ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री, बहन सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके परिजनों, समर्थकों को ये दु:ख सहन करने का संबल प्रदान करें।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दु:ख व्यक्त करते हुए लिखा कि हमारी सुषमा दीदी हम सभी को छोड़कर चली गईं। अस्वस्थ होने के बावजूद भी वे विदिशा सहित प्रदेश की जनता की सेवा करती रहीं। मुझे उनसे हमेशा ही जनसेवा की प्रेरणा मिली। दीदी आप जहां कहीं भी हों, आपका आशीर्वाद सदैव मिलता रहे, यही ईश्वर से प्रार्थना है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की ओजस्वी नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराजजी का निधन देश और पार्टी के अलावा मेरी व्यक्तिगत क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को ये दु:ख सहने का साहस दे।

Posted By: Hemant Upadhyay

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