भोपाल। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019( Swachh survekshan 2019) को लेकर नगर निगम ने विशेष नीति के तहत काम किया। शहर में साफ-सफाई के काम को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर काम किया गया। निगम अधिकारियों ने बताया कि रूपरेखा तैयार करने से पहले रहवासियों, व्यापारी संघों, जनप्रतिनिधियों से रायशुमारी की गई। इसके अलावा देश-विदेश के अन्य स्वच्छ शहरों में सफाई व्यवस्था पर भी विचार मंथन किया गया। इसमें कई प्रयोग शहर के लिए भी नए थे।

स्वच्छता के लिए चलाए गए प्रोजेक्ट पर एक नजर

मशीनरी से मुख्य मार्गों की सफाई

शहर के प्रमुख मार्गों की सफाई के लिए विदेशी स्वीपर मशीनों को लाया गया। मशीनों के माध्यम से रोजाना 400 किमी की सड़कों की सफाई करने का लक्ष्य तय किया गया। इस प्रोजेक्ट पर 27 करोड़ रुपए भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएससीडीसीएल) द्वारा खर्च किए जा रहे हैं।

हाइटेक हुए सुलभ कॉम्प्लेक्स

शहर को खुले से शौच मुक्त (ओडीएफ) डबल प्लस (++) का दावा केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय ने स्वीकार किया। ओडीएफ डबल प्लस के लिए 250 तय अंक भी भोपाल को मिले। शहर के करीब 200 पब्लिक और कम्यूनिटी टायलेट को हाइटेक बनाया गया। सभी सार्वजनिक टायलेट में ड्रायर, सेनेटरी वेंडिंग मशीन, पुश नल, एग्जास्ट फैन, पानी, लाइटिंग, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम आदि लगाए गए।

भानपुर खंती में कचरा निष्पादन

40 साल से भानपुर खंती में जमा कचरे के निष्पदान के लिए 300 टन क्षमता का प्लांट तैयार हो चुका है। अब खंती के साइंटिफिक क्लोजर का काम शुरू हो चुका है। आगामी 3 सालों में कचरे का पहाड़ खत्म कर दिया जाएगा। इससे आसपास के क्षेत्र में गंदगी और धुएं की समस्या से निजात मिल जाएगी। नगर निगम ने इसके लिए सूरत की सौराष्ट्र एन्वायरो प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को काम सौंपा है। यहां पड़े कचरे से खाद बनाने का काम शुरू हो चुका है। खंती कुल 36 एकड़ में फैली है। इसमें से 21 एकड़ जमीन निगम को खाली मिल जाएगी। वहीं, 15 एकड़ जमीन पर रिसाइकिल नहीं होने वाले मटेरियल की कैपिंग की जाएगी।

व्यवसायिक क्षेत्रों में डस्टबिन

व्यस्ततम बाजार वाले क्षेत्रों में कचरा संग्रह करने के लिए आवश्यकता के हिसाब से छोटे नए डस्टबिन स्थापित किए गए। सेंसर के माध्यम से ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। डस्टबिन भरते ही संबंधित अमले के पास मैसेज आ जाता है। शहर में 1000 डस्टबिन लगाए जा रहे हैं।

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन

जिन क्षेत्रों में कचरा उठाने वाले वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं वहां मैजिक वाहन भेजे जाएंगे। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रोजाना डोर टू डोर कचरा का कलेक्शन हो सके।

कचरा सेग्रिगेशन

शहर के तीन ट्रांसफर स्टेशनों पर एकत्र होने वाले कचरे को अलग-अलग करने के लिए मशीनें को लेकर काम किया गया। इससे गीला, सूखा कचरा के साथ ही प्लास्टिक व धातु को भी अलग किया जा सकेगा।

स्वच्छ मंच अभियान

नागरिकों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने के लिए सोशल साइट पर स्वच्छ मंच अभियान चलाया गया। जिसमें नागरिक स्वच्छता संबंधित गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। साथ ही जानकारी दे सकते हैं।

स्वच्छ मैप ऐप

कचरा की फोटो खींचकर इस ऐप के माध्यम से निगम को जानकारी भेजने की व्यवस्था की गई। 24 घंटे में कार्रवाई का समय तय किया गया है। यह गूगल से लिंक किया गया है। यह एप पहले से ही चल रहा है।

व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम

नगर निगम के 650 वाहनों में जीपीएस से मॉनिटरिंग की जा रही है। अब अन्य वाहनों में भी जीपीएस लगाए जा रहे हैं। निगम के बेड़े में 950 से अधिक वाहन हैं। कचरा वाहन की स्थिति पता लगाने व शिकायतों के त्वरित निदान के लिए इसका अहम योगदान है।

विकेन्द्रीकृत कम्पोस्टिंग

शहर में 150 वाहनों एवं 1905 रेग पिंकर्स के माध्यम से घर-घर से गीला एवं सुखा कचरा एकत्र किया जा रहा है। घरों से कचरा एकत्र करने के साथ ही 53 बल्क कचरा उत्पादन स्थलों को चिन्हित कर विकेन्द्रीकृत कम्पोस्टिंग के माध्यम से जैविक कचरे से खाद बनाने का कार्य किया जा रहा है।

बायोमीथेनाइजेशन एवं बायोगैस प्लांट

शहर के 5 स्थानों पर बायोमीथेनाइजेशन एवं बायोगैस प्लांट भी स्थापित किए गए। ताकि शहर से निकलने वाले कचरे की मात्रा में कमी लाई जा सके। इनकी नियमित मानीटरिंग के साथ रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है।

एमआरएफ सेंटर

निगम द्वारा 4 एमआरएफ सेंटर्स स्थापित किए गए। जिसमें विभिन्न प्रकार के कचरे का निपटान किया जा रहा है। इसमें प्लास्टिक अपशिष्ट निष्पादन के भोपाल मॉडल द्वारा प्लास्टिक कचरे को सीमेंट उद्योगों में ईधन के रूप में, सड़क निर्माण एवं रिसाईकिल कर पाइप आदि उत्पाद बनाने के उपयोग में लाया जा रहा है।

शौचालयों का निर्माण

भोपाल नगर निगम सीमा अंतर्गत 41 हजार 985 व्यक्तिगत शौचालयों निर्माण व इनमें पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई। इतना ही नहीं बल्कि इनका फीडबैक लेने के लिए भी निगम ने व्यवस्था की।

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन सेवाओं की निगरानी अधिकारियों द्वारा की जा रही है। साथ ही निगम के वाहनों पर वीटीएमएस सिस्टम के माध्यम से वाहनों की ऑन लाइन मानीटरिंग की जा रही है। निगम ने कचरा संग्रहण वाहनों की गतिविधियों को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए 700 वाहनों में वीटीएमएस स्थापित किया गया है।

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