भोपाल। उत्पादन स्थल से ही सूखे-गीले कचरे का अलग-अलग सेग्रीगेशन नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती है। इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में कचरा सेग्रीगेशन पर 70 अंक तय किए गए हैं। नगर निगम के पास डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाले मैजिक वाहनों में सूखे और गीले कचरे के लिए अलग अलग कंपार्टमेंट बनाए गए हैं। लेकिन इनमें निर्धारित कंपार्टमेंट में कचरा नहीं डाला जाता। यही कचरा सीधे ट्रांसफर स्टेशन भेज दिया जाता है। यहां भी गीला और सूखा कचरा अलग-अलग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निगम के बड़े वाहनों से आदमपुर छावनी डंपिंग साइड में इसी कचरे को भेज दिया जाता है।

निगम अधिकारियों का तर्क है कि जिन स्थानों पर कंपोस्ट यूनिट है वहां गीला कचरे को अलग किया जाता है। लेकिन अभी शाहजहांनाबाद स्थित ट्रांसफर स्टेशन को छोड़कर अन्य स्थानों पर ट्रांसफर स्टेशन पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है।

ऐसे समझें नफा-नुकसान

- ट्रांसफर स्टेशन या डंपिंग साइड में कंपोस्ट यूनिट के लिए कचरा अलग-अलग करने के लिए ज्यादा अमले की जरूरत होती है। इसमें समय भी ज्यादा लगता है। यदि घरों से ही कचरा अलग-अलग एकत्र होना शुरू हो जाए तो इसका निष्पादन आसान हो जाएगा।

- सूखे के साथ गीला कचरा जब डंपिंग साइड पर पहुंचता है तो इसमें आग लगने की आशंका अधिक होती है। पिछले दिनों आदमपुर छावनी में आग लगने की घटना हो चुकी है। इससे यहां स्थापित 350 टन क्षमता का कंपोस्ट प्लांट भी जलकर खाक हो गया।

- कचरा सेग्रीगेशन नहीं होने पर निगम को अंकों का नुकसान होगा।

यह है बड़ी खामी

कचरा कलेक्शन का समय तय नहीं : निगम का दावा है कि 100 फीसदी कॉलोनियों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है। लेकिन मैजिक वाहनों या साइकिल रिक्शा का समय तय नहीं है। जिससे लोग कचरा नहीं डाल पाते। बाद में लोग बाहर कचरे को फेंक देते हैं, जिससे गंदगी फैल जाती है। जबकि इंदौर में कचरा वाहन का समय तय है। साथ ही यहां सुबह और शाम दो बार कचरा वाहन आता है।

प्रसार प्रसार में कमी : स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान पिछले साल सूखा गीला कचरा अलग-अलग रखने को लेकर अभियान चलाया गया था। लेकिन सर्वेक्षण समाप्त होने के बाद इस अभियान को बंद कर दिया गया।

स्पॉट फाइन नहीं : अलग-अलग कचरा नहीं एकत्र करने पर स्पॉट फाइन का प्रावधान है। लेकिन निगम द्वारा स्पॉट फाइन की कार्रवाई नहीं की जाती। जबकि इंदौर में यह व्यवस्था है कि यदि गीला-सूखा कचरा अलग-अलग नहीं दिया जाता तो कचरे को एकत्र करने से निगम अमला इंकार कर देता है।

पॉलीथिन पर नहीं लग पाई रोक : शहर के हर क्षेत्रों में साप्ताहिक व डेली लगने वाले हाट बाजार हैं। यहां प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग किया जा रहा है। जिस पर सख्ती से रोक नहीं लगाई जा सकी। इन्हीं पॉलीथिन के कारण नालियां जाम होने की समस्या होती है।

इंदौर की तर्ज पर भोपाल में लिया जाएगा तकनीक का सहारा

इंदौर की तर्ज पर भोपाल के कचरा ट्रांसफर स्टेशनों में भी तकनीक का उपयोग होगा। यहां वाहनों से आने वाले कचरे का तौल होगा। इसके बाद कितनी गाड़ियों से कचरा भेजा गया, इसका डाटा भी दर्ज किया जाएगा। इससे कॉलोनियों व ट्रांसफर स्टेशनों में कचरे के ढेर नहीं लग पाएंगे। निगम आयुक्त विजय दत्ता तकनीक को समझने के लिए दो दिन इंदौर पहुंचे थे।

एनजीओ की मदद लेंगे

कचरा सेग्रीगेशन के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए के लिए हम एनजीओ की मदद लेंगे। ताकि लोग अपने घरों में ही दो डस्टबिन रखें। ट्रांसफर स्टेशनों में ही अलग-अलग कचरा एकत्र होगा।

-बी विजय दत्ता, आयुक्त ननि

Posted By: Nai Dunia News Network

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