भोपाल। खटलापुरा नाव हादसे में डूब गया परवेज शेख पुत्र स्व.सईद खान (12) का परिवार 100 क्वार्टर बस्ती में सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है। परवेज जब 7 साल का था, तभी से वह कॉलोनी की नवरात्रि गणेश उत्सव समिति में शामिल हो गया था। झांकी के निर्माण से लेकर पूजा-पाठ में भी वह पूरी श्रद्धा से शामिल होता था। उसकी आस्था और झांकी निर्माण में रुचि देखते हुए पंडित ने उसका नाम दीपक 'विश्वकर्मा' रख दिया था। बस्ती में सभी उसे परवेज उर्फ दीपक के नाम से ही जानते थे।

परवेज की मौत की खबर मिलते ही उसके परिवार में सुबह से ही मातम का माहौल था। परवेज के पिता का 5 वर्ष पहले निधन हो चुका है। परवेज के बड़े भाई शाहरुख ने बताया कि परवेज पांचवीं में पढ़ता था। आंबेडकर पार्क में झांकी निर्माण के लिए भूमि पूजन के समय से ही परवेज समिति के लिए काम में जुट जाता था। परवेज के रिश्तेदार मो.शकील और राजा ने बताया कि झांकी के काम में शामिल होने पर परिवार में परवेज को कोई नहीं टोकता था। समिति के लोग भी टीम के सबसे छोटे सदस्य का पूरा ध्यान रखते थे।

गुरुवार रात को पूर्णाहुति के बाद गणेशजी की महाआरती की गई थी। इसके बाद रात 11 बजे धूमधाम से मूर्ति विसर्जन के लिए रवाना हुई। हमेशा की तरह परवेज भी झांकी के साथ तालाब तक सबके साथ गया था, लेकिन शुक्रवार सुबह 7 बजे जैसे ही हादसे की खबर कॉलोनी में पहुंची,हाहाकार मच गया। इस घटना में परवेज भी अपने साथियों के साथ वहां चला गया,जहां से कोई कभी वापस नहीं आता।

1. मंत्री बंगले पर दस दिन पहले लगी थी नौकरी

प्रवीण उर्फ सन्नी ठाकरे की नौकरी दस दिन पहले ही एक मंत्री के बंगले पर लगी थी। दो भाई बहनों में प्रवीण छोटा था। बहन की शादी हो चुकी है। सन्नी उर्फ प्रवीण ओबीसी बीजेपी मोर्चा मंडल अवधपुरी का उपाध्यक्ष भी था। पिता नारायण ने बताया कि रात को खाना खाने के बाद प्रवीण ने कहा कि वह मूर्ति विसर्जित करने जा रहा है। उससे मना किया कि रात ज्यादा हो गई है, मत जा। वह नहीं माना और चला गया। वह इकलौता बेटा था। सन्नी के पिता निजी कंपनी में कर्मचारी हैं व मां कपड़े सीलती है। हादसे के बाद मां सदमे में बार-बार बेहोश हो रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है।

2. परिवार का खर्च उठाने वाला रोहित ही नहीं रहा

हादसे में मृतक रोहित मौर्य तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। वह भेल में ठेकेदारी करता है। पूरे परिवार का पालन पोषण का खर्च रोहित ही उठा रहा था। हादसे से गमगीन परिवार ने एक व्यक्ति को नौकरी देने की मांग भी की है। परिवार का कहना है कि अब हमारा सब कुछ खत्म हो चुका है। बहनों को संभालने वाला भाई नहीं रहा। पिता के कंधों पर बड़ा बोझ आ जाएगा।

3.पिता से बोलकर गया था, आता हूं

अरुण मालवीय के पिता एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। अरुण गुरुवार रात दुकान पर पहुंचा और पिता से कहा कि मूर्ति विसर्जित करने जा रहा हूं। वर्तमान में उसने पढाई छोड़ दी थी। वह पिता के साथ दुकान पर बैठता था। गुरुवार रात करीब साढ़े 9 बजे वह दुकान पर पहुंचा और पिता से कहा कि वह मूर्ति विसर्जित करने जा रहा हैं। पिता कुछ कह पाते, इसके पहले अरुण जल्दी से भाग गया था।

4.घर में पैसे देकर मूर्ति विसर्जित करने चला गया

हादसे में मृतक विशाल सोनवाने, बैनर-पोस्टर का काम करता है। वह बीते दिनों कटनी में काम से गया था। वहां से उसने रकम कमाई। वह गुरुवार रात दस बजे से घर लौटा था। लौटते ही उसने घर में सामान रखा और घरवालों को पैसे दे दिए। इसके बाद वह घर पर दोस्तों के साथ मूर्ति विसर्जित करने का कहकर निकल गया। विशाल तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था।

5. फुटबॉल खेलने जर्मनी जाने वाला था अर्जुन

मामा सुनील शर्मा का कहना है कि परिवार पर पहाड़ टूटा है। उनका भांजा अर्जुन शर्मा 11 वीं क्लास का छात्र था। एक उभरता फुटबालर खिलाड़ी था। उसके पिता योगेंद्र शर्मा दिल्ली में अलग रहते हैं। वह काफी सालों से परिवार से अलग रहते हैं। उनकी मां मेडिकल स्टोर चलाती है। अर्जुन इकलौता बेटा था। उसके जाने के बाद अब उसकी छोटी बहन बची है। उसका दोस्त तम्मी उसे घर से बुलाकर ले गया। वह जल्दी जर्मनी जाने वाला था। वह स्टेट फुलबॉल खेल चुका था। वह प्रदेश का एक उभरता फुटबॉलर था। उसके जाने के बाद उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में शव को सुरक्षित रखा गया है। उनके पिता योगेंद्र शर्मा का दिल्ली से आने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस हादसे में सबसे दुख की बात यह है कि अर्जुन की मां ने रोका था कि पानी के पास मत जाना, लेकिन वह चला गया।

6.पिता का इकलौता सहारा चला गया

मृतक राहुल मिश्रा अपने पिता का इकलौता बेटा था। पिता सुनील मिश्रा ने बताया कि राहुल 18 साल का था और 11 वीं क्लास में पढ़ता था। वह एक अच्छा फुटबॉलर था। वह अर्जुन का खास दोस्त है। वह दिनभर पढ़ाई करने के बाद मेरा सहारा बनता है। उसको लेकर काफी सपने देखे था। वह अपने तम्मी दोस्त था। उसके साथ वह गणेश मूर्ति विसर्जन के लिए गया गया था। उसके इस तरह से जाने के बाद बेसहारा हो गया हूं।

7. आंखों के सामने पानी में डूबा छोटा भाई

इस हादसे में 6 युवक बच गए। इनमें शामिल है कमल राना। कमल राना खुद तो बचे और अपने दो दोस्तों को भी बचाया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह अपने भाई हरि उर्फ हर्ष राना को नहीं बचा सके। हरि की इस हादसे में डूबने से मौत हो गई। कमल का कहना है कि बैलेंस बिगड़ने से नाव डूबने लगी। हमारे साथी नाव में बैठे-बैठे ही डूबने लगे। कुछ कूद गए। मैं भी तैरकर दूसरी नाव तक पहुंचा, लेकिन वो भी डूबने लगी। मेरे दोस्त मेरे सामने डूब गए। मुझे तैरना आता था। थोड़ी देर तालाब में तैरता रहा। लेकिन कुछ कर नहीं सका। इसके बाद एक नाव आई उसमें चढ़ गया। तब तक सभी डूब गए थे। नाव में मेरे साथ मेरा भाई हरि भी सवार था। मैंने थोडी देर उसे तैरकर इधर-उधर देखा, लेकिन तब तक वह डूब गया था।

8. शुक्रवार को परीक्षा थी, अब पिता के लिए जीवन भर परीक्षा

तीन भाईयों का सबसे छोटा

करण लुडेरे पिता पन्नालाल अपने परिवार का सबसे लाडला था। वह तीन भाईयों में सबसे छोटा था। उसके पिता प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उसकी शुक्रवार को परीक्षा थी। उसकी हादसे की खबर सुबह सात बजे लगी थी। तब से उनकी तबियत खराब हो गई है। उनके भाई बाहर थे तो उनके शव को मर्चुरी में सुरक्षित रखवा दिया गया था। बाद में भाई के आने के बाद शव को हमीदिया अस्पताल से परिजनों के सुपुर्द कर दिए थे। परिजनों को रो- रोकर बुरा हाल है।

9. बड़ा ठेकेदार बनना चाहता था आवेश

19 साल का आवेश घर में सबसे बड़ा था। उसके पिता रामनाथ गांधी मार्केट में टेलर का काम करते हैं। आवेश ने पिछले साल दसवी करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। उसके बाद एक ठेकेदार के पास काम करने लगा था। रामनाथ के मुताबिक वो उम्र में जरूर छोटा था, लेकिन परिवार की हर मुसीबत में पूरी जिम्मेदारी से उनका साथ देता था। आर्थिक रूप से भी उनका पूरा सहयोग करता था। उसका सपना था कि वो एक बहुत बड़ा ठेकेदार बनकर पूरे परिवार की आर्थिक तंगी दूर करे। आवेश के दो छोटे-भाई बहन और हैं, लेकिन उनका लगाव आवेश से बहुत ज्यादा था। आवेश बोलकर गया था कि वो सुबह तक घर आ जाएगा। अब उसकी मौत के बाद कुछ समझ नहीं आ रहा है कि उसकी यादों के सहारे जीवन कैसे कटेगा। उन्होनें अपना सबकुछ खो दिया है।

10. घर के लाडले के लिए देखे सपने चूर हो गए

18 साल का राहुल घर में सबसे छोटा था। उससे बड़े तीन भाई-बहन हैं। वो प्राइवेट स्कूल में कक्षा 12वी में पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता मुन्नालाल एमपी नगर में एक निजी संस्थान में काम करते हैं। मुन्नालाल ने बताया कि राहुल घर में सबसे छोटा होने की वजह से सबका लाड़ला था। उसकी मौत की खबर के बाद से ही पूरा परिवार सुधबुध खो बैठा है। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है कि कल तक हमारे बीच रहा हमारा लाड़ला कैसे अचानक इस संसार को अलविदा कह गया। कितने सारे सपने देखे थे उसके लिए सबकुछ टूट गए।