मिशन शक्ति के डायरेक्टर डीआरडीओ के प्रसिद्घ वैज्ञानिक डॉ. राजाबाबू से चर्चा

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

हमारा काम नई टेक्नोलॉजी डेवलप करना है। उसका उपयोग कहां करना है यह सरकार तय करती है। कोई भी नया मिशन तभी शुरू होगा, जब सरकार चाहेगी। हालांकि, डेवलपमेंट सतत चलने वाली प्रक्रिया है और हम इस कार्य में लगातार लगे हुए हैं।

यह कहना था डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक व मिशन शक्ति के डायरेक्टर डॉ. यू राजाबाबू का। भेल दशहरा मैदान में शनिवार से शुरू हुए 8वें भोपाल विज्ञान मेला में बतौर अतिथि शामिल होने आए डॉ. यू राजाबाबू ने 'नवदुनिया लाइव' से चर्चा में यह बात कही। उल्लेखनीय है कि राजाबाबू के नेतृत्व में भारत ने आसमान में विदेशी सेटेलाइट को मिसाइल से भेदने की क्षमता हासिल की है। प्रसिद्घ वैज्ञानिक ने बताया कि पाकिस्तान के साथ कभी युद्घ की स्थिति बनी तो हम तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, यह कभी नहीं माना जा सकता कि हम सर्वशक्तिमान हैं, क्योंकि स्पेस और विज्ञान पर आधारित रिसर्च वर्क अधिकतर देशों में हो रहे हैं। नासा से मदद से जुड़े एक सवाल के जबाव में राजाबाबू ने कहा कि युद्घ के लिए तकनीकी मदद बाहर से नहीं मिलेगी, इसे हमें ही डेवलप करना होगा। मिशन शक्ति को लेकर उन्होंने बताया कि मिशन लांच करने से पहले हमारी पूरी टीम ने बहुत मेहनत की। हम बिना सोये 16 से 18 घंटे काम करते थे। जब मिशन का काउंट-डाउन चल रहा था तब टेंशन भी बहुत ज्यादा थी, लेकिन सफलता के बाद चेयरमैन समेत पूरी टीम की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने बताया कि किसी भी सेटेलाइट की एक निश्चित उम्र होती है और लांचिंग से पहले कई टेस्ट लिए जाते हैं। हमारा मिशन सफल होगा इसको लेकर हम मिसाइल की डिजाइन पर तो श्योर थे, लेकिन कंपोनेंट को लेकर संशय हमेशा बना रहता है।