भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। शिक्षाकर्मी संवर्ग से अध्यापक संवर्ग में संविलियन होने के बाद जनवरी 2016 से छठवें वेतनमान के मुताबिक वेतन निर्धारण में व्याप्त विसंगितयों में सुधार की मांग को लेकर शासकीय अध्यापक संगठन शुक्रवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मिलेंगे। उनकी मांग है कि छठवें वेतनमान का निर्धारण सही ढंग से करने के बाद पुन: छठवें वेतनमान का अनुमोदन करने के निर्देश जारी करें। संगठन के प्रदेश संयोजक उपेन्द्र कौशल ने बताया कि शासन ने वेतनमान का निर्धारण 2007 से करने के निर्देश दिए हैं जब अध्‍यावक संवर्ग का गठन किया गया था। जबकि शिक्षाकर्मी संवर्ग की नियुक्ति 1998 में हुई थी एवं अध्यापक संवर्ग में संविलियन नियुक्ति की सेवा अवधि की निरंतरता में मान्य किया गया है। इसलिए वेतनमान का निर्धारण 2007 के स्थान पर 1998 के आधार पर होना चाहिए। शिक्षा विभाग 2007 से नियुक्ति मान्य कर रहा है, जिससे शिक्षाकर्मी संवर्ग से अध्यापक संवर्ग में संविलियन हुए कर्मचारी की 9 वर्ष की सेवा अवधि शून्य हो रही है। वहीं 1998, 2001, 2002 एवं 2003 में नियुक्त हुए शिक्षकों को एक समान वेतन प्राप्त हो रहा है। वहीं पदोन्नति, क्रमोन्नति प्राप्त अध्यापकों को भी अपने से निचले पद एवं बाद में नियुक्ति वालों को एक समान वेतन मिल रहा है।

मप्र शासकीय अध्‍यापक संगठन ने यह भी मांग की है कि प्रदेश के 2 लाख 37 हजार अध्यापकों को डेढ़ साल के एरियर्स का भुगतान नहीं हुआ है। यह भुगतान भी जल्‍द किया जाए।

Posted By: Ravindra Soni

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