भोपाल। गणेश विसर्जन की तैयारियों को लेकर प्रशासन, पुलिस और नगर निगम ने इस बार करीब 10 बैठकें की। इसके बावजूद तैयारियों में चूक हुई और विसर्जन के दौरान डूबने से 11 युवकों की मौत हो गई। इससे राजधानीवासी स्तब्ध हैं। वहीं मृतकों के परिजन हादसे के लिए एसडीईआरएफ, जिला और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। उनका आरोप है कि मौके पर पुलिस बल कम था। एसडीईआरएफ और निगम के गोताखोर नहीं थे। अगर सुरक्षा व्यवस्था होती तो किशोर व युवकों बचाया जा सकता था।

हमीदिया अस्पताल की मर्चुरी के बाहर सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। यहां शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा था। वहीं बाहर शासन-प्रशासन की लापरवाही को लेकर परिजन आक्रोशित होने लगे थे। इसे देखते हुए भारी सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। सुबह करीब 10.30 बजे के पहले सभी शवों का पीएम हो गया था। मृतक सन्नी ठाकरे के शव को छोड़कर सभी मृतकों के शव उनके निवास भेज दिए गए।

परिजनों के साथ खड़े रहे पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा मंत्री व जनप्रतिनिधि

अस्पताल में परिजन बिलख रहे थे। तभी उन्हें ढांढस बंधाने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री को देख एक परिजन उनके गले से लिपटकर रोने लगा। जिसे पूर्व मुख्यमंत्री से ढांढस बंधाया। मंत्री पीसी शर्मा, डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व सांसद आलोक संजर, पूर्व मंत्री व मौजूदा विधायक आलोक संजर, पूर्व मंत्री सुरेश पचौरी, विधायक कृष्णा गौर, आरिफ मसूद ने परिजनों को सांत्वना देते रहे। परिजनों के जाने के बाद सभी जनप्रतिनिधि हमीदिया अस्पताल से लौटे।

रो-रोकर बेसुध हुए परिजन, विवाद की स्थिति भी बनी

अस्पताल में मृतक युवकों के कई परिजनों की हालत बुरी हो गई थी। कुछ बेसुध हो गए थे। इन्हें एक-दूसरे लोग समझाइश दे रहे थे। कुछ महिलाओं ने तो आपा खो दिया और प्रशासन को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। इस दौरान प्रशासन और लोगों के बीच विवाद की स्थिति भी बनी थी।

मौत के बाद सतर्क दिखा प्रशासन

11 युवकों की मौत के बाद अस्पताल में कमिश्नर कल्पना श्रीवास्तव, कलेक्टर तरुण पिथा़ेडे, आईजी योगेश चौधरी, डीआईजी इरशाद वली समेत सभी अधिकारी पीएम होने तक सतर्क दिखे।