Bhopal News: अंजलि राय, भोपाल । अपने-अपने बच्चों को प्यार-दुलार देने के लिए दंपती ने खुद को एक-दूसरे से दूर कर लिया। शादी के एक माह बाद ही पत्नी को लगा कि यहां उसके बेटे की देखभाल में सौतेलापन जैसा व्यवहार होगा, इसलिए वह पांच साल के बेटे को लेकर मायके चली गई। पति ने भी उसकी इस इच्छा को भांपकर अपनी छह साल की बेटी की परवरिश पर ध्यान देने लगा। दोनों अपनी-अपनी जिम्मेदारियों में इतने मशगूल हो गए कि एक-दूसरे की जरूरत ही नहीं महसूस हुई। अब नौ साल बाद दोनों बच्चों की पहल से ही दंपती ने एक होने का फैसला किया है। दोनों की यह दूसरी शादी थी। दोनों को पहली शादी से एक-एक बच्चे थे।

जब दूसरी शादी के बाद पत्नी अपने बेटे के साथ ससुराल पहुंची तो उसे अहसास हुआ कि सौतेला पिता और उसके घर वालों से उसके बच्चे को वह प्यार नहीं मिल सकेगा, जो वह चाहती है। वहीं सौतेली बेटी भी उसे मां मानने को तैयार नहीं थी। इसी कारण से दोनों अलग हो गए। इधर, बेटा जब 15 साल का हुआ तो वह अपने दादा के यहां चला गया। दादा ही पोते की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाते थे।

इस बीच दूसरे पति की बेटी भी 16 साल की हो गई थी। मां की उदासी से परेशान बेटे ने सौतेली बहन से बात कर सौतेले पिता से मिलवाने के बारे में सोचा। इसके बाद उसने मां से कुटुंब न्यायालय में घर वापस जाने के लिए गुहार लगवाई। इसके बाद दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की गई, जहां दोनों ने साथ रहने को राजी हुए।

सौतेली बेटी ने भी मां को गले लगाया

नौ साल बाद जब पति-पत्नी काउंसिलिंग में पहुंचे तो पत्नी अपने पति को पहचान नहीं पाई। वहीं पति भी उसे देखकर हैरान रह गया। पत्नी अपने बेटे की परवरिश में इतनी रम गई थी कि उसे कुछ ख्याल ही नहीं था। वहीं पति भी पहले से अधिक बदला हुआ था। इस दौरान सौतेली बेटी ने मां को गले लगा लिया और घर चलने के लिए कहा। मां ने भी बेटी को प्यार से गले लगाया और बेटे से भी मिलवाया।

बिना मां के ही निकल गया बेटी का बचपन

पति ने कहा कि उसने अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा। पत्नी ही इसके लिए तैयार नहीं थी। वह अपने बेटे को लेकर चली गई। उसने कहा कि वह तो अपनी बेटी के लिए मां लाया था, लेकिन उसका पूरा बचपन बिना मां के ही निकल गया।

इनका कहना है

दंपती अपने-अपने बच्चे की परवरिश में इतने मशगूल हो गए कि उन्हें एक साथ रहने का अहसास नहीं हुआ। अब इन्हें साथ करने के लिए दोनों बच्चों ने ही पहल की है। काउंसिलिंग कर साथ भेजा गया।

- नुरुन्न्शिां खान, काउंसलर, कुटुंब न्यायालय

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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