प्रवीण मालवीय, भोपाल। 25 जून 1975 की आधी रात को देश में आपातकाल लागू किया गया था। इसी के साथ देश भर में 19 महीने की मनमानी एवं अत्याचारों का वह दौर शुरू हुआ जिसके बारे में बताते हुए आज भी आंदोलनकारी भावुक हो जाते हैं। आपातकाल की बरसी पर नवदुनिया ने हरिहर शर्मा एवं मीसाबंदी रहे वर्तमान में लोकतंत्र सेनानी संघ के महामंत्री सुरेन्द्र दि्वेदी से चर्चा कर उनकी यादों के माध्यम से उस दौर के संघर्ष को जाना।

चार महीने की बेटी को पत्नी की गोद में छोड़कर गए जेल

तब मेरी नई-नई शादी हुई थी बिटिया चार महीने की ही थी। जय प्रकाश नारायण के नव निर्माण आंदोलन में विद्यार्थी परिषद् के शिवपुरी जिला संगठन मंत्री के रूप में खुद को झोंक दिया (चित्र में तीर के नीचे)। आपात काल लगा तो कई महीनों तक मैं छुपा रहा आखिरकार पर्चे बांटने के दौरान पुलिस ने पीछा कर गिरफ्तार कर लिया। हमारी कोठरी में इतने कैदी ठूंसे हुए थे कि रात में करवट लेने के लिए भी बगल वाले को भी करवट बदलने की गुजारिश करनी पड़ती थी। इस दौरान मैने जो कष्ट सहे वह तो सहे ही, नवविवाहिता पत्नी ने ससुराल में रहकर वृद्ध सास-ससुर की अकेले सेवा की। वह दौर आज भी रोंगटे खड़े कर देता है, मन भर जाता है।

- जैसा कि मीसाबंदी एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश कार्य समिति सदस्य हरिहर शर्मा ने बताया

सात महीने छुपने के बाद खुद दी गिरफ्तारी, दो बार गया जेल

मेरी उम्र तब 22 वर्ष थी। मैं जबलपुर में युगधर्म में नौकरी करने के साथ कानून की पढ़ाई कर रहा था। समाचार पत्र व्यवस्था विरोधी माना जाता था। ऐसे में आपातकाल लगा तो कुछ ही समय में मेरे नाम का भी वारंट जारी हो गया। मैं भूमिगत हो गया, सात महीने बाद संघ ने जेल भरो आंदोलन शुरू किया तो मैँ सामने आया और विरोध करते हुए जेल गया। 21 दिन तक 151 में निरुद्ध रखने के बाद मुझ पर मीसा लगा दिया गया। जबलपुर केन्द्रीय जेल में हालात बुरे थे, सब्जी के नाम पर रस के बीच गोभी की डंठल और दाल के नाम पर पानी मिलता था। दो महीने बाद तकनीकी कारणों से जेल से छूट गया लेकि 1976 के सितम्बर में कानून की परीक्षा देते हुए एक बार फिर मुझे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस बार फिर ढ़ाई महीने जेल में काटे। आपातकाल के बाद सरकार बदली तो केन्द्रीय जेल में व्यवस्थाएं सुधारने की मांग की जो पूरी भी हुई। आज भी वे दिन याद आते हैं तो कई तरह भावनाएं उमड़ पड़ती है जिन्हें शब्दों में शायद मैं कभी ठीक से कह भी नहीं सकता।

- जैसा कि मीसाबंदी और लोकतंत्र सेनानी संघ के महामंत्री सुरेन्द्र दि्वेदी ने बताया

Posted By: Ravindra Soni

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