भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। अनूपपुर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरसी सिंह बिसेन की बेटी जया सिंह की तरह सब संवेदनशील हो जाए तो सरकारी मदद के अलावा भी हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। बुधवार को राजधानी भोपाल में ऐसा ही हुआ। रानी कमलपति रेलवे स्टेशन पर सुबह करीब पौने 10 बजे हार्ट हटैक से यात्री विजय मसानी तड़प रहे थे। रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान उन्हें सीपीआर दे रहे थे। इंतजार इस बात का था कि 108 एंबुलेंस आ जाए तो उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया जाए। जवान दो बार काल कर चुके थे, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची थी। इसी बीच जया अपनी मां साधना सिंह बिसेन को लेने स्टेशन पहुंची थी। मरीज की हालत और जवानों के प्रयासों को देखते हुए वह आगे आईं और अपनी मां को लेना छोड़ पहले मरीज और जवानों को तुरंत अपने वाहन में बैठाया। वह 10 नंबर स्थित एक निजी अस्पताल पहुंच गई। यहां मरीज का तुरंत इलाज चालू हो गया। अब मरीज की स्‍थिति खतरे से बाहर है।

दरअसल, खंडवा के रहने वाले विजय मंसानी अपने पत्नी मनीषा मसानी और दो बच्चों के साथ बुधवार सुबह पंजाब मेल एक्सप्रेस से सुबह 9.35 बजे रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर उतरे थे। कुछ समय बाद उन्हें सीने में तेज दर्द होने लगा और वह तड़पने लगे। उन्‍हें चक्कर आया और वह प्लेटफार्म पर गिर गए। मौके पर आरपीएफ जवान दीपक कुमार ने उन्हें संभाला और वरिष्ठों को सूचना दी। तब तक सब इंस्पेक्टर अरविंद ओझा और आरक्षक इंदर सिंह यादव पहुंचे। यात्री की हालत बिगड़ चुकी थी। यात्री की पत्नी ने जवानों को बताया कि ट्रेन में भी उनके पति सीने में हल्का दर्द होने की बात कर रहे थे। तब जवानों को एहसास हो गया था कि मरीज को हार्ट अटैक आया है। आरक्षक इंदर सिंह यादव ने उन्हें सीपीआर दिया और बैटरी चलित कार से उन्हें लेकर स्टेशन के बाहर पार्किंग तक पहुंचे। जहां न्यायाधीश की बेटी जया थी, जो मदद के लिए आगे आईं। इस दौरान अन्य यात्रियों ने भी मरीज की मदद की।

पत्नी का बीएड में दाखिला कराने आए हैं विजय मसानी

विजय मसानी पेशे से फोटोग्राफर हैं। वे अपनी पत्नी को बीएड में दाखिला दिलाने के लिए भोपाल आए हैं। दाखिला दिलाते उसके पहले ही स्टेशन के अंदर उनकी तबीयत बिगड़ गई। हालांकि निजी अस्पताल के डाक्टरों का कहना है कि अब वह खतरे से बाहर है।

विजय को भर्ती कराने के बाद मां को दोबारा लेने पहुंची जया

उधर, विजय मसानी को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद जया अपनी मां को लेने के लिए दोबारा रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पहुंची। तब तक सुबह 9.59 बजे उनकी मां स्टेशन पर उतर गईं थी। वह अनूपपुर से आ रही थीं उन्हें तोडा इंतजार भी करना पड़ा। बेटी द्वारा जरूरत के समय यात्री व उसके परिवार को पहुंचाई गई मदद का किस्सा सुना तो उनकी मां खुश हो गईं। मां का कहना था कि हमें अपनों की चिंता करने के साथ जरूरतमंदों की भी चिंता करनी चाहिए।

मरीज को तड़पते देख मुझसे रहा नहीं गया। मैंने तुरंत मदद करने का निर्णय लिया। इस बीच मां से कहा कि वे स्टेशन पहुंचकर थोड़ा इंतजार कर लें। हर किसी को जरूरत के समय मदद करनी चाहिए। मुझे यह सीख मेरे माता-पिता व परिवार से मिली है। मैं बहुत खुश हूं।

- जया सिंह, मरीज को स्टेशन से अस्पताल पहुंचाने वाली

जवानों की सूझबूझ और जया की मदद से एक यात्री की जान बच गई। यह आरपीएफ और रेलवे के लिए गर्व की बात है। यदि देरी होती तो कुछ भी हो सकता था। विकट समय में हम सबको एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।

- बी रामकृष्णा, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, भोपाल रेल मंडल

Posted By: Ravindra Soni

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