भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)।

हबीबगंज-इटारसी के बीच निर्माणाधीन तीसरी रेल लाइन के बरखेड़ा-बुधनी घाट सेक्शन में पांचवी सुरंग बनाने का काम चालू है। शुक्रवार शाम को मंडल के डीआरएम उदय बोरवणकर ने इस सुरंग को बनाने के काम का जायजा लिया है। यह सुरंग 530 मीटर लंबी है। इस रेलखंड में तीसरी रेल लाइन पर पांचवी सबसे लंबी सुरंग 1080 मीटर की है जिसका काम जुलाई 2020 में पूरा हो गया था। हबीबगंज- इटारसी के बीच पढ़ने वाला यह बरखेड़ा-बुधनी रेल खंड 26.50 किलोमीटर लंबा है जो की पूरी तरह घाट सेक्शन है। यहां तीसरी रेल लाइन बनाना जोखिम भरा है जिसमें एक साल का समय अभी भी लगना है। यह दावा रेल विकास निगम लिमिटेड की तरफ से किया जा रहा है जो कि निर्माण के लिए नोडल एजेंसी है। वास्तविकता यह है कि इस घाट सेक्शन में तीसरी रेल लाइन के काम को पूरा होने में कम से कम दो साल लगेंगे।

बता दें कि इस घाट सेक्शन में सबसे पहले 1080 मीटर लंबी सुरंग बनाने का काम शुरू हुआ था जिसका काम जुलाई 2020 में लगभग पूरा हो गया था। तब पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर जोन के महाप्रबंधक शैलेंद्र कुमार सिंह ने जायजा लिया था। इस खंड में 200- 200 मीटर लंबी दो और 140 मीटर लंबी तीन अन्य सुरंगे भी बनाई जा रही है। वे भी निर्माणाधीन है।

900 करोड़ रूपये होंगे खर्च

इस रेलखंड में तीसरी रेल लाइन पर 900 करोड़ रूपये खर्च होने हैं। यह अनुमानित राशि है जो कि बढ़ भी सकती है। रेल विकास निगम लिमिटेड और जोन के रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सबसे दुर्गम और पहाड़ों वाला रेलखंड है इसलिए इस पर सबसे अधिक राशि खर्च होनी प्रस्तावित है। साथ ही इस रेलखंड में वन्य प्राणियों के लिए अतिरिक्त अंडरपास बनाए जाने हैं इसलिए लागत बढ़ गई है।

डीआरएम ने कार्य की प्रगति के संबंध में मौके पर आरवीएनएल के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि इन सुरंगों को विशेष गिट्टी रहित ट्रैक से सुसज्जित किया जाएगा, जिसके लिए न्यूनतम रखरखाव की आवश्यकता होगी और इसमें जल निकासी की सुविधा और प्रकाश व्यवस्था होगी। पर्यावरण और पारिस्थिति की तंत्र के संरक्षण और सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों पर भी चर्चा की गई।

वन्यप्राणियों को दिक्कत न हो इसलिए पहाड़ काटने की बजाय बना रहे सुरंग

इस रेलखंड में आए दिन बाघ, तेंदुए, भालू ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। इस बात को देखते हुए मध्यप्रदेश वन्य प्राणी विभाग की सलाह पर रेलवे ने नई लाइन बिछाने के लिए पहाड़ों को काटने की बजाए सुरंग बनाने का निर्णय लिया है। इसके पहले से रेलखंड में दो लाइने हैं जो करीब 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है इनके लिए मुश्किल से एक और दो सुरंग बनाई है। बाकी सभी जगह पहाड़ों को काटा गया है। पहाड़ काटने से वन्य प्राणियों को पटरी पार करने में दिक्कत होती है और वे ट्रेन की चपेट में आकर जान गवाते हैं।

यात्रियों को ये होगा फायदा

यह सबसे कठिन घाट सेक्शन है जिसमें ट्रेनों को बहुत सावधानी से चलाना पड़ता है इसलिए रफ्तार सामान्य ट्रैक की तुलना में कम कर दी जाती है। जब नई लाइन बन जाएगी तो उस पर अन्य लाइनों की तुलना में अधिक रफ्तार से ट्रेनों को चलाया जा सकेगा। इस वजह से यात्री ट्रेनें यह घाट सेक्शन पार करने में कम समय लगेगा। यात्रियों का समय बचेगा। वे जल्दी एक से दूसरे स्टेशनों पर पहुंच सकेंगे।

Posted By: Ravindra Soni

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