भोपाल(राज्य ब्यूरो)। उदयपुर में आयोजित चिंतन शिविर में कांग्रेस ने भले ही 50 साल की आयु वाले युवा नेताओं को आगे लाने की बात कही हो, लेकिन हकीकत कुछ और है। मध्य प्रदेश से चिंतन शिविर में जो दिग्गज नेता गए हैं, उनमें से ज्यादातर 70 पार हैं। एकमात्र अरुण यादव ही ऐसे नेता हैं, जो 50 साल से कम आयु के हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि 50 साल से कम के युवा नेताओं को 50 प्रतिशत पद दिए जाएंगे। लेकिन मध्य प्रदेश कांग्रेस में तो युवा नेताओं का टोटा पड़ गया है।

कौन -- कौन गए हैं चिंतन शिविर में

नेता -- जन्म तिथि -- उम्र

कमल नाथ -- 18 नवंबर 1946 -- 76 साल

दिग्विजय सिंह -- 28 फरवरी 1947 -- 75 साल

सुरेश पचौरी -- एक जुलाई 1952 -- 70 साल

डा. गोविंद सिंह -- एक जुलाई 1951 -- 71 साल

विवेक तन्खा -- 21 सितंबर 1956 -- 66

अरुण यादव -- 15 जनवरी 1974 -- 48 साल

कमल नाथ चार साल से मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष

उदयपुर चिंतन शिविर में यह भी फैसला किया गया है कि जो लोग पांच साल से संगठन के पदों पर जमे हैं, उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। इधर मप्र की बात की जाए तो कमल नाथ को 26 अप्रैल 2018 को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। उनके पांच साल का कार्यकाल 2023 में पूरा होगा। यानी देखा जाए तो मप्र के विधानसभा चुनाव से ठीक पांच महीने पहले ही कांग्रेस को अपनी नीति मुताबिक नया प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त करना होगा।

क्षेत्रीय नेताओं में युवा नेताओं की उपेक्षा

कांग्रेस में कुछ क्षेत्रीय नेता हैं, जो अपेक्षाकृत युवा हैं लेकिन वे उपेक्षित हैं। उनमें जीतू पटवारी, तरुण भनौत और मीनाक्षी नटराजन जैसे नाम हैं।

सरकार की नींद 12 दिन बाद खुली, दबाव में लिया निर्णय : कमल नाथ

भोपाल। सिवनी जिले में जनजातीय वर्ग के दो युवाओं की हत्या की जांच के लिए एसआइटी गठित करने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नींद 12 दिन बाद खुली। कांग्रेस एवं जनजातीय वर्ग के दबाव में यह निर्णय लिया गया है। नाथ ने कहा कि अभी भी जो घोषणा हुई है, वह अधूरी है। कई जिम्मेदारों को बचा लिया गया है। एसआइटी की बजाय उच्च स्तरीय जांच की घोषणा की जानी चाहिए। जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए। सरकार नेमावर कांड में भी ऐसे ही पहले सीबीआइ जांच से बचती रही, छह माह बाद उसे भी माना।

Posted By: Prashant Pandey

NaiDunia Local
NaiDunia Local